बेंगलुरु, 29 अगस्त (भाषा) कर्नाटक सरकार ने इस साल राज्य के अधिकतर हिस्सों में कमजोर मॉनसून की वजह से कृत्रिम बारिश कार्यक्रम को सुचारू रूप से लागू करने, उसकी निगरानी करने और तकनीकी मार्गदर्शन सुनिश्चित करने के लिए दो अलग-अलग समितियां गठित की हैं।
अधिकारियों ने बताया कि साल 2026-27 के दौरान राज्य में बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात से निपटने के लिए यह कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य उच्च प्रौद्योगिकी का सही इस्तेमाल करके राज्य में खड़ी फसलों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाना है।
उन्होंने बताया कि इस साल कृत्रिम बारिश कार्यक्रम को लागू करने के लिए निगरानी समित और तकनीकी परामर्श एवं आकलन समिति नाम से दो समिति बनाने का आदेश 28 अगस्त को जारी किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि ये समितियां कम बारिश वाले इलाकों में कृत्रिम बारिश योजना को वैज्ञानिक तरीके से और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए काम करेंगी।
जल संसाधन मंत्री एन. चालुवरयास्वामी के कार्यालय से जारी एक बयान के मुताबिक निगरानी समिति कृत्रिम बारिश कार्यक्रम के पूरे कार्यान्वयन की देखरेख, निगरानी और समीक्षा करेगी और राज्य के अपर मुख्य सचिव और विकास आयुक्त इस समिति के अध्यक्ष होंगे। बयान में कहा गया है कि समिति में छह सदस्य होंगे और कर्नाटक सिंचाई निगम के प्रबंध निदेशक इसके सदस्य सचिव होंगे।
इस बीच, तकनीकी परामर्श एवं आकलन समिति कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (केएसएनडीएमसी) को कृत्रिम बारिश कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर तकनीकी सहायता, मार्गदर्शन और सलाह देगी।
केएसएनडीएमसी के निदेशक इस समिति के अध्यक्ष होंगे। इसमें आठ सदस्य, एक सदस्य सचिव और एक विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल होंगे।
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धीरज माधव
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