आबकारी नीति मामले में केजरीवाल को याचिका वापस लेने की अनुमति मिली

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आबकारी नीति मामले में केजरीवाल को याचिका वापस लेने की अनुमति मिली

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  • Publish Date - February 12, 2026 / 04:31 PM IST,
    Updated On - February 12, 2026 / 04:31 PM IST

नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी (आप) नेता अरविंद केजरीवाल को आबकारी नीति से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के सिलसिले में ईडी द्वारा जारी किये गये समन को चुनौती देने संबंधी याचिका वापस लेने की बृहस्पतिवार को अनुमति दे दी।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते क्योंकि उन्हें समन के अनुपालन में एजेंसी के समक्ष पेश न होने के लिए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों में पहले ही बरी कर दिया गया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि एजेंसी निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करेगी।

केजरीवाल के वकील ने कहा, ‘‘काफी समय बीत चुका है… मैं याचिका पर जोर नहीं दूंगा। मैं उचित समय पर संवैधानिक दलीलें पेश करूंगा।’’

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा, ‘‘इस तरह, याचिका वापस ले ली गई मानकर खारिज की जाती है।’’

दिल्ली की एक अदालत ने 22 जनवरी को केजरीवाल को दो अलग-अलग मामलों में बरी कर दिया था। ये मामले कथित आबकारी नीति घोटाले की जांच में शामिल होने के लिए ईडी के समक्ष पेश नहीं होने के कारण दर्ज किए गए थे।

अदालत ने इस बात का जिक्र किया था कि आरोपी एक मुख्यमंत्री थे और ‘‘उन्हें भी आवागमन का मौलिक अधिकार प्राप्त था।’’

अदालत ने माना था कि ‘‘समन की विधिवत तामील को लेकर कानूनी चुनौती स्वीकार्य है।’’

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने इस मामले में उच्च न्यायालय का रुख किया था क्योंकि ईडी द्वारा उन्हें 21 मार्च, 2024 को अदालत में पेश होने के लिए नौवां समन जारी किया गया था।

उच्च न्यायालय की पीठ ने 20 मार्च, 2024 को ईडी से याचिका की स्वीकार्यता के संबंध में अपना जवाब दाखिल करने को कहा था।

अगले दिन, इसने ईडी से केजरीवाल की गिरफ्तारी से संरक्षण के अनुरोध संबंधी याचिका पर भी जवाब देने को कहा था और बताया था कि ‘‘इस स्तर पर’’ वह उन्हें कोई अंतरिम राहत देने के लिए इच्छुक नहीं है। केजरीवाल को उसी शाम ईडी द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था।

केजरीवाल फिलहाल धनशोधन मामले में अंतरिम जमानत पर हैं।

भ्रष्टाचार के कथित मामले में 26 जून, 2024 को सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किये जाने के बाद, उन्हें 13 सितंबर, 2024 को उच्चतम न्यायालय द्वारा इस मामले में जमानत दे दी गई थी।

ईडी ने आरोप लगाया है कि इस मामले में अन्य आरोपी केजरीवाल के संपर्क में थे और उन्होंने उस आबकारी नीति को तैयार करने में सहयोग किया था जिसे अब रद्द किया जा चुका है। इस नीति के परिणामस्वरूप उन्हें अनुचित लाभ मिला और आम आदमी पार्टी को रिश्वत मिली।

केजरीवाल ने अपनी याचिका में धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी है, जो गिरफ्तारी, पूछताछ और जमानत देने से संबंधित हैं।

उन्होंने याचिका में कई मुद्दे उठाये हैं जिनमें यह भी शामिल था कि क्या कोई राजनीतिक दल धनशोधन रोधी कानून के दायरे में आता है?

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश