विजयन के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली ईडी रिपोर्ट पर केरलम सरकार ने पुलिस जांच के आदेश दिए

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विजयन के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली ईडी रिपोर्ट पर केरलम सरकार ने पुलिस जांच के आदेश दिए

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  • Publish Date - September 22, 2026 / 05:23 PM IST,
    Updated On - September 22, 2026 / 05:23 PM IST

तिरुवनंतपुरम, 22 सितंबर (भाषा) केरलम में कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की सरकार ने सीएमआरएल “रिश्वत” मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और उनके पति पी. ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ कार्रवाई की मांग से जुड़ी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रिपोर्ट के आधार पर जांच का आदेश दिया है।

गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट की जांच का जिम्मा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सौंपने का फैसला किया है।

सूत्रों ने कहा कि राज्य पुलिस की अपराध शाखा बिना कोई प्राथमिकी दर्ज किए इस मामले की जांच करेगी।

यह फैसला सरकार द्वारा महाधिवक्ता (एजी) की कानूनी राय पर विचार करने के बाद लिया गया। महाधिवक्ता ने ईडी की रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई के बारे में फैसला राज्य पुलिस पर छोड़ दिया था।

ईडी ने राज्य पुलिस प्रमुख आर. ए. चंद्रशेखर को पत्र भेजकर विजयन, वीणा और रियास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था। यह अनुरोध धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई जांच और तलाशी के दौरान कथित तौर पर जुटाए गए ‘‘सबूतों’’ के आधार पर किया गया था।

चेन्निथला ने कहा कि महाधिवक्ता का पत्र डीजीपी को मिला था, जिसे उन्होंने गृह सचिव को भेज दिया। इसके बाद गृह सचिव ने आगे की कार्रवाई के लिए निर्देश मांगते हुए मामला सरकार के समक्ष रखा।

चेन्निथला ने कहा, ‘‘मैंने उचित कानूनी राय के लिए पत्र महाधिवक्ता को भेजा था। महाधिवक्ता की कानूनी राय दो दिन पहले मिली।’’

गृह मंत्री ने कहा कि मंगलवार को उन्होंने मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन के साथ इस मामले पर चर्चा की और जांच का आदेश देने का फैसला किया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘उस कानूनी राय के आधार पर आज सुबह मुख्यमंत्री के साथ चर्चा हुई। चर्चा के बाद मामले की जांच के लिए डीजीपी को जिम्मेदारी सौंपने का आदेश कुछ ही देर में जारी कर दिया जाएगा।’’

चेन्निथला ने बताया कि यह कानूनी सलाह उच्चतम न्यायालय के दो फैसलों के आधार पर दी गई थी।

उन्होंने कहा कि इन फैसलों में कहा गया है कि जानकारी मिलने पर पुलिस या जांच एजेंसियों के लिए कदम उठाना अनिवार्य है।

चेन्निथला ने कहा कि इनमें यह भी बताया गया है कि किन स्थितियों में प्राथमिकी दर्ज करने से पहले शुरुआती जांच की जा सकती है।

उन्होंने कहा, ‘(पीएमएलए, 2002 की) धारा 66(2) के तहत, जब किसी कानून प्रवर्तन एजेंसी को जानकारी मिलती है, तो उस पर कार्रवाई करना कानूनी रूप से एजेंसी की जिम्मेदारी होती है। इसी जिम्मेदारी के आधार पर डीजीपी को पत्र भेजा गया था।’

उन्होंने उच्चतम न्यायालय के ‘ललिता कुमारी’ फैसले का भी जिक्र किया।

चेन्निथला ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों समेत कुछ खास तरह के मामलों में शुरुआती जांच की जा सकती है, जिनमें मिली जानकारी से स्पष्ट रूप से किसी संज्ञेय अपराध का पता नहीं चलता हो।

चेन्निथला ने कहा, ‘ललिता कुमारी फैसले में विशेष रूप से कहा गया है कि जहां कोई संज्ञेय अपराध स्पष्ट रूप से प्रकट नहीं होता, वहां यह निर्धारित करने के लिए एक प्राथमिक जांच की जा सकती है कि कोई संज्ञेय अपराध हुआ है या नहीं।’

उन्होंने कहा, ‘इन सभी पहलुओं को कानूनी सलाह में शामिल किया गया। उसी सलाह के आधार पर, और आज सुबह मुख्यमंत्री के साथ मामले पर चर्चा करने के बाद, डीजीपी को जांच का जिम्मा सौंपने का फैसला लिया गया।’

चेन्निथला ने कहा कि डीजीपी जांच के संबंध में आगे फैसला करेंगे।

ईडी ने आरोप लगाया है कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाएल लिमिटेड (सीएमआरएल) ने ‘आईटी परामर्श सेवाओं’ के नाम पर वीणा की कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ को 2.78 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान किया था। ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ अब बंद हो चुकी है।

ईडी ने जून में वीणा से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की थी।

भाषा जोहेब नरेश

नरेश