खरगे, राहुल ने कहा: जनगणना का मौजूदा स्वरूप अस्वीकार, प्रश्नावली रद्द की जाए

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खरगे, राहुल ने कहा: जनगणना का मौजूदा स्वरूप अस्वीकार, प्रश्नावली रद्द की जाए

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  • Publish Date - August 25, 2026 / 05:05 PM IST,
    Updated On - August 25, 2026 / 05:05 PM IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर जनगणना की प्रश्नावली पर आपत्ति जताई है और आग्रह किया कि इस प्रश्नावली को रद्द कर राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से व्यापक चर्चा के बाद नयी प्रश्नावली तैयार की जाए।

कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं का कहना है कि जनगणना का वर्तमान स्वरूप स्वीकार नहीं है तथा जातियों और समुदायों की सही संख्या तथा उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन तभी संभव है, जब जाति की पहचान दर्ज करने की प्रक्रिया स्पष्ट हो।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे और राहुल गांधी ने 20 अगस्त को लिखे पत्र में कहा कि भारत में सामाजिक न्याय की नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विश्वसनीय आंकड़ों की आवश्यकता है।

उनके अनुसार, विभिन्न जातियों की वास्तविक आबादी और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन नहीं होने पर शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और आरक्षण सहित सामाजिक न्याय से जुड़े फैसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

कांग्रेस नेताओं ने जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए अपनाए गए ‘ओपन-एंडेड’ प्रश्न के तरीके पर सवाल उठाया है।

उनके अनुसार, भारत में एक ही जाति अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों तथा भाषाओं के आधार पर पहचानी जाती है।

पत्र में कहा गया है, ‘‘ऐसे में यदि एक ही जाति के लोग जनगणना में अलग-अलग नामों से दर्ज होंगे, तो एक जाति हजारों नामों में बंट जाएगी। देश में लाखों जातियों के नाम निकलेंगे, और जाति जनगणना से हासिल पूरा आंकड़ा ही अनुपयोगी हो जाएगा।’’

खरगे और राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि मौजूदा व्यवस्था से देश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की कुल आबादी का सही आंकड़ा कैसे सामने आएगा, क्योंकि प्रश्नावली में ‘पिछड़ा वर्ग’ शब्द को ही शामिल नहीं किया गया है।

कांग्रेस नेताओं ने जातियों की पहले से तैयार ‘ड्रॉप-डाउन’ सूची का सुझाव दिया है, जिसके तहत जनगणना के फॉर्म या डिजिटल ऐप में जातियों के आधिकारिक नाम पहले से उपलब्ध हों और गणनाकर्ता संबंधित व्यक्ति द्वारा बताए गए विवरण के आधार पर सूची में से उपयुक्त जाति का चयन कर सके।

पत्र में सुझाव दिया गया है कि ऐसी सूची मौजूदा सरकारी सूचियों, सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग से संबंधित सूचियों तथा भारतीय मानवशास्त्र सर्वेक्षण जैसे आधिकारिक स्रोतों के आधार पर तैयार की जा सकती है।

खरगे और राहुल गांधी ने दावा किया कि बिहार और तेलंगाना में किए गए जातिगत सर्वेक्षणों में भी सूची आधारित व्यवस्था अपनाई गई थी। उन्होंने दोनों राज्यों के सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई जाति सूचियों को प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र के साथ संलग्न किया है।

खरगे और गांधी के पत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने संवाददाताओं से कहा कि केंद्र सरकार को वर्तमान प्रश्नावली को रद्द कर सभी राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों के साथ बातचीत के बाद पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से यह जनगणना कराई जा रही है, उसे हम स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि यह सिर्फ लीपापोती है।’’

रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री पहले कई वर्षों तक जातिगत जनगणना नहीं कराना चाहते थे, लेकिन इसकी घोषणा के बाद से लगातार ‘‘यू-टर्न’’ ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि खरगे और राहुल गांधी इस विषय पर प्रधानमंत्री को कई पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है।

रमेश ने 21 सितंबर, 2021 को शिक्षा मंत्रालय की ओर से उच्चतम न्यायालय में दाखिल एक हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि इसमें कहा गया था कि जातिगत जनगणना कराने के लिए पहले से जातियों की सूची तैयार करनी होगी।

उन्होंने कहा कि बिहार में जातिगत सर्वेक्षण के दौरान 215 जातियों की सूची तैयार की गई थी और तेलंगाना में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई गई थी।

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘देश में करीब 4,200 जातियां हैं और प्रत्येक राज्य के पास जातियों की अपनी सूची है, जिसके आधार पर आरक्षण दिया जाता है। केंद्र सरकार के पास भी अपनी सूची है।’’

रमेश ने इस बात पर जोर दिया कि यदि सरकार की नीयत साफ है तो उसे खरगे और राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्रों को संज्ञान में लेना चाहिए।

केंद्र ने बीते 14 अगस्त को जनसंख्या गणना के चरण के तहत उत्तरदाताओं से पूछे जाने वाले 40 सवालों को अधिसूचित किया। इनमें जाति और कोविड रोधी टीकाकरण की जगह से संबंधित सवाल भी शामिल हैं।

इस महीने की शुरुआत में जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनगणना एक से 30 सितंबर तक होगी।

भाषा हक हक नेत्रपाल

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