kishtwar jawan shaheed / image source: ani x handle
किश्तवाड़: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के सिंहपोरा क्षेत्र में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच जारी मुठभेड़ में भारतीय सेना के एक जवान के शहीद होने की खबर आई है। शहीद जवान की पहचान विशेष बल के हवलदार गजेंद्र सिंह के रूप में हुई है। Kishtwar Jawan Shaheed की यह घटना ऑपरेशन TRASHI-I के दौरान घटी, जब आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड से हमला किया। इस हमले में कुल आठ जवान घायल हुए, जिनमें से हवलदार गजेंद्र सिंह ने अपने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
जानकारी के अनुसार, हवलदार गजेंद्र सिंह ने आतंकियों के हमले का सामना करते हुए अपने साथियों को सुरक्षित निकाला और ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस बहादुरी और समर्पण के लिए उन्हें सेना की तरफ से सर्वोच्च सम्मान दिया गया। Kishtwar Jawan Shaheed मामले में व्हाइट नाइट कॉर्प्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) सहित सेना के सभी रैंकों और जवानों ने हवलदार गजेंद्र सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
बता दें कि बीते एक दिन से जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के सिंगपोरा क्षेत्र में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ जारी है। मिली जानकारी के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षाबलों ने आतंकियों को दबाव में लाने और उन्हें घेरने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। मुठभेड़ के दौरान दोनों तरफ से गोलीबारी जारी है और सुरक्षाबलों द्वारा आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि किश्तवाड़ में सुरक्षा बलों की निगरानी और संचालन के तहत आतंकियों के हर संभावित कदम पर नजर रखी जा रही है। क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि आतंकियों को कोई भी सुरक्षित मार्ग न मिल सके। सुरक्षाबलों की उच्च स्तरीय रणनीति के तहत इलाके को चारों तरफ से घेरा गया है और स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की व्यवस्था की गई है।
आतंकवादियों की गतिविधियों पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है। जानकारी मिली है कि हाल ही में कठुआ जिले में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकवादी ठिकानों का भंडाफोड़ किया था। इन ठिकानों से देसी घी, बादाम और अन्य सामग्री बरामद हुई थी, जो यह दर्शाती है कि आतंकवादी अपने ठिकानों में लंबे समय तक छिपकर गतिविधियां चलाने की योजना बना रहे थे। हालांकि, उस अभियान के दौरान आतंकियों ने जंगल का लाभ उठाकर भागने में सफलता पाई थी, जबकि सुरक्षाबलों के एक जवान को चोट आई थी।
राजौरी सेक्टर में हाल ही में ड्रोन देखे जाने की घटना ने भी सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा दिया था। अधिकारियों का कहना था कि यह ड्रोन सीमा पार से निगरानी या किसी संदिग्ध उद्देश्य के लिए भेजा गया था। इसके चलते भारतीय सेना ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत कार्रवाई की। इस तरह की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन लगातार भारत में साजिशें रचने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेष रूप से, आतंकवादी रफीक नाई उर्फ सुल्तान के खिलाफ जनवरी की शुरुआत में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी। उसकी 10 लाख रुपये की संपत्ति को कुर्क किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, यह संपत्ति मेंढर तहसील के नक्का मझारी इलाके के गांव नर में स्थित 4 मरला और 02 सरसाई कृषि भूमि थी। रफीक नाई पाकिस्तान से प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-उल-मुजाहिदीन/जम्मू कश्मीर गजनवी फोर्स का हैंडलर और लॉन्च कमांडर है। वह कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित है और आतंकवादी घोषित किया जा चुका है।
सुरक्षाबलों ने बताया कि पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद राज्य में सुरक्षा सतर्कता को और बढ़ा दिया गया है। सेना और पुलिस दोनों ही अलर्ट मोड में हैं और हर बारीक गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। किश्तवाड़ में चल रही मुठभेड़ इस बात का संकेत है कि आतंकवादी अपने प्रयासों को जारी रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारतीय सुरक्षाबल उन्हें किसी भी तरह के आतंक फैलाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।