चतरा, 11 जुलाई (भाषा) झारखंड के चतरा जिले में एक सड़क दुर्घटना में मारे गए 28 वर्षीय सीआरपीएफ जवान के परिजनों को मुआवजा देने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग पर किए गए सड़क जाम के कारण शनिवार को भी यातायात ठप रहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, बृहस्पतिवार शाम शुरू हुआ यह सड़क जाम शनिवार अपराह्न तीन बजे तक जारी रहा। इसके कारण दोनों ओर सैकड़ों वाहन लंबी कतारों में फंसे रहे।
उन्होंने बताया कि यह मामला बृहस्पतिवार शाम उस समय शुरू हुआ, जब लावालौंग थाना क्षेत्र के बिराजपुर गांव निवासी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान लक्ष्मण कुमार यादव की मोटरसाइकिल की डंपर से टक्कर हो गई। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल यादव की बाद में अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। घटना के समय वह सिमरिया से अपने घर लौट रहे थे।
पुलिस के अनुसार, यह दुर्घटना देल्हो घाटी के पास हुई। यादव जम्मू-कश्मीर में तैनात थे और एक महीने की छुट्टी पर सात दिन पहले ही अपने घर आए थे।
सिमरिया के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) नगरगोजे शुभम भाऊसाहेब ने कहा, ‘‘परिजन 11 लाख रुपये के मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में परिवहन कंपनियों के साथ बातचीत जारी है। स्थानीय लोग हजारीबाग जिले की ओर से इस मार्ग पर कोयला ढोने वाले वाहनों का परिचालन बंद करने की भी मांग कर रहे हैं। इस संबंध में जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया है।’’
सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सिमरिया विधानसभा प्रभारी और केंद्रीय समिति के सदस्य मनोज चंद्रा स्थानीय लोगों के साथ शनिवार सुबह 10 बजे से घटनास्थल पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘हमारी दो प्रमुख मांगें हैं। पहली, हजारीबाग से इस मार्ग पर कोयला ढोने वाले वाहनों के परिचालन पर रोक लगाई जाए और दूसरी, इन वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों के परिजनों को कम से कम 11 लाख रुपये का निश्चित मुआवजा दिया जाए।’’
चंद्रा ने आरोप लगाया कि हजारीबाग जिले के चट्टी-बरियातू से सिमरिया-देल्हो मार्ग पर कोयला ढोने वाले वाहन लापरवाही से चलाए जा रहे हैं, जिससे सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि परिवहन कंपनियों की मनमानी चरम पर है और प्रशासनिक अधिकारी कोयला कंपनियों के समर्थन से ऐसे मामलों को दबा रहे हैं।
भाषा प्रचेता नेत्रपाल
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