lok adalat/ image source: IBC24
दिल्ली: दिल्ली में 10 जनवरी 2026 को नेशनल Lok Adalat का आयोजन होने जा रहा है। यह उन वाहन मालिकों के लिए अच्छी खबर है जिनके पुराने ट्रैफिक ई-चालान (e-challan) लंबित हैं। इस मौके पर वे अपने चालान को कम जुर्माने के साथ जमा कर सकते हैं या पूरी तरह माफ करवा सकते हैं। दिल्ली के सभी जिला न्यायालयों में यह Lok Adalat आयोजित की जाएगी।
इस Lok Adalat का मुख्य उद्देश्य पुराने छोटे ट्रैफिक चालानों को तेजी से सेटल करना है। इसमें केवल 30 सितंबर 2025 तक के पेंडिंग चालान ही शामिल होंगे। अगर आपकी कार, मोटरसाइकिल, स्कूटर या अन्य वाहन पर कोई चालान लंबित है, तो इसे सेटल कराने का यह सही अवसर है।
इस लोक अदालत में भाग लेने के लिए पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन 5 जनवरी 2026 सुबह 10 बजे से शुरू हो चुके हैं। आप इस लिंक
पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। एक दिन में अधिकतम 45,000 चालान और कुल 1,80,000 चालान ही लिए जाएंगे। इसलिए रजिस्ट्रेशन जल्दी करना जरूरी है।
स्टेप 1 – पेंडिंग चालान चेक करें:
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस या परिवहन पोर्टल पर अपने वाहन का नंबर डालकर यह देखें कि कौन-कौन से चालान लंबित हैं।
स्टेप 2 – ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन:
रजिस्ट्रेशन लिंक पर जाकर फॉर्म भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। इसके बाद आपको टोकन नंबर और अपॉइंटमेंट लेटर मिलेगा, जिसे डाउनलोड और प्रिंट कर लेना जरूरी है।
स्टेप 3 – कोर्ट पहुंचें:
10 जनवरी को अपने अपॉइंटमेंट समय पर कोर्ट पहुंचें। लोक अदालत दिल्ली के सभी जिला न्यायालयों में आयोजित की जाएगी, जैसे तीस हजारी, साकेत, रोहिणी, द्वारका, पटियाला हाउस, कड़कड़डूमा और राउज एवेन्यू। साथ में RC, ड्राइविंग लाइसेंस, बीमा, प्रदूषण सर्टिफिकेट और टोकन का प्रिंटआउट साथ रखें।
स्टेप 4 – सुनवाई और सेटलमेंट:
कोर्ट में जज आपके मामले की सुनवाई करेंगे। वे जुर्माने को कम कर सकते हैं या पूरी तरह माफ कर सकते हैं।
स्टेप 5 – पेमेंट:
अगर संशोधित जुर्माना तय होता है, तो उसे उसी समय काउंटर पर जमा करें। इसके बाद चालान सिस्टम से हट जाएगा।
Lok Adalat में केवल छोटे ट्रैफिक अपराध ही निपटाए जाएंगे, जैसे बिना हेलमेट या सीट बेल्ट चलाना, ओवर-स्पीडिंग, रेड लाइट जंप, गलत पार्किंग, बिना PUC सर्टिफिकेट गाड़ी चलाना या नंबर प्लेट न होना। गंभीर अपराध जैसे शराब पीकर गाड़ी चलाना, हिट-एंड-रन या बड़े सड़क हादसे लोक अदालत में नहीं सेटल होंगे। साथ ही, लोक अदालत में सिविल मामले जैसे छोटे पारिवारिक विवाद और संपत्ति संबंधी मामूली केस भी निपटाए जा सकते हैं।