नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) भारतीय नौसेना का प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी 10 महीने की महासागरीय यात्रा पर रवाना हो गया है और इस दौरान यह पोत 22,000 समुद्री मील की दूरी तय करेगा एवं 13 देशों के 18 बंदरगाहों पर जाएगा।
दक्षिणी नौसेना कमान (एसएनसी) के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल समीर सक्सेना ने मंगलवार को कोच्चि के नौसैनिक अड्डे से आईएनएस सुदर्शिनी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जो लंबी दूरी की नौकायन यात्रा ‘लोकायन 26’ की शुरुआत का प्रतीक है।
नौसेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह ‘‘ऐतिहासिक यात्रा’’ भारत के समुद्री प्रयास का एक सशक्त प्रतीक है और यह वैश्विक समुद्री गतिविधियों में देश की प्रमुखता को दर्शाती है।
यह पोत पिछले साल दिसंबर में तिरुवनंतपुरम में नौसेना दिवस समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित ‘ऑपरेशनल डेमंस्ट्रेशन’ का भी हिस्सा था।
वाइस एडमिरल सक्सेना ने इसके चालक दल के साथ बातचीत के दौरान भारत के ‘एम्बेसडर’ के रूप में पोत की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा महासागरों और सीमाओं से परे है तथा दुनिया भर में ‘दोस्ती के सेतु’ बनाती है।
नौसेना ने बताया कि पारंपरिक विदाई समारोह में तीन मस्तूलों वाले पोत ने नौसेना बैंड की जोशीली धुन के साथ अपने पाल फहराए।
अधिकारियों ने बताया कि 10 महीने की इस तैनाती के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी लगभग 22,000 समुद्री मील की यात्रा करेगा और 13 देशों के 18 बंदरगाहों का दौरा करेगा। इस यात्रा की मुख्य बातों में से एक फ्रांस में ‘एस्केल ए सेट’ में जहाज की भागीदारी है। मार्च-अप्रैल 2026 में यूरोप के प्रमुख समुद्री त्योहारों में से एक में अपनी शुरुआत करते हुए आईएनएस सुदर्शिनी भूमध्य सागर में प्रसिद्ध बड़े पोतों के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करेगा।
नौसेना ने कहा कि इसके अलावा, जुलाई 2026 में अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के हिस्से के रूप में यह पोत न्यूयॉर्क में ‘अंतरराष्ट्रीय परेड ऑफ सेल्स’ के दौरान एक भव्य अंतरराष्ट्रीय बेड़े यानी ‘सेल 250’ में शामिल होगा।
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित आईएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का 54-मीटर का नौकायन प्रशिक्षण जहाज है जो 20 पाल से सुसज्जित है। इसका पाल क्षेत्र 1,000 वर्ग मीटर से अधिक है।
भाषा सिम्मी मनीषा
मनीषा