पुरी बारिश और कड़ी सुरक्षा के बीच भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के लिए तैयार

पुरी बारिश और कड़ी सुरक्षा के बीच भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के लिए तैयार

पुरी बारिश और कड़ी सुरक्षा के बीच भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के लिए तैयार
Modified Date: July 16, 2026 / 09:42 am IST
Published Date: July 16, 2026 9:42 am IST

पुरी, 16 जुलाई (भाषा) ओडिशा के पुरी शहर में भारी बारिश और कड़ी सुरक्षा के बीच भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की रथ यात्रा के अनुष्ठान बृहस्पतिवार को शुरू हुए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि इस रथ यात्रा को देखने के लिए मंदिर के ‘बड़ा डंडा’ (यात्रा मार्ग) पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही एकत्र होने शुरू हो गए थे।

अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं और रथों के गुजरने वाले रास्ते पर जल-जमाव की समस्या से निपटने के लिए कदम उठाए हैं।

विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा से ठीक पहले पुरी में मूसलाधार बारिश हुई। मौसम विभाग के मुताबिक शहर में 143.8 मिमी बारिश हुई है और दिन में और भारी बारिश और आंधी-तूफान की प्रबल संभावना है।

अधिकारियों ने बताया कि ‘बड़ा डंडा’ से बारिश का पानी निकालने और रथ यात्रा को आसानी से आगे बढ़ाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, क्योंकि भक्त भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को 12वीं सदी के मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर श्री गुंडिचा मंदिर तक खींचकर ले जाएंगे।

मंदिर के एक पदाधिकारी ने बताया कि पूर्ववर्ती पुरी रियासत के राजा गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब द्वारा पारंपरिक ‘छेरा पहरा’ (रथों में झाड़ू लगाने की रस्म)करने और पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के आने के बाद, शाम चार बजे भक्त रथ खींचना शुरू करेंगे।

अधिकारियों ने बताया कि पुरी शहर में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जिसके तहत राज्य पुलिस, केंद्रीय बलों, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के लगभग 13,000 जवानों को तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन स्थिति में त्वरिक कार्रवाई के पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक विग्रहों को मंदिर से बाहर लाने और उन्हें रथों पर विराजमान करने की रस्में सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे के बीच होंगी।

पिछले साल रथ यात्रा के दौरान, तीनों देवताओं का जन्मस्थान माने जाने वाले गुंडिचा मंदिर के पास मची भगदड़ में तीन लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।

एक अधिकारी ने बताया कि इस साल ऐसी स्थिति से बचने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है।

भाषा धीरज प्रशांत

प्रशांत


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