दिल्ली। किसी भी देश की विकास दर यानी जीडीपी का बढ़ना मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत होता है, यही कारण है कि सवा साल बाद जब भारतीय अर्थव्यवस्था में पहली बार विकास दर में आधा फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई तो केंद्र सरकार की बांछें खिल आईं। निश्चित रूप से ये किसी भी सरकार के लिए आर्थिक मोर्चे पर अच्छी खबर होती है, लेकिन अगर अलग-अलग सेक्टर्स की विकास दर को देखें तो भले ही सरकार के लिए खुशखबरी हो, देश का इंतजार पूरा होना अभी बाकी है।
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एग्रीकल्चर सेक्टर यानी कृषि क्षेत्र में विकास दर चिंताजनक है। खाद्यान्न उत्पादन विकास दर में भारी गिरावट आई है। सितंबर 2016 में कृषि ग्रोथ रेट 4.1 प्रतिशत थी, जो एक साल बाद सितंबर 2017 में गिरकर सिर्फ 1.7 प्रतिशत रह गई है। कृषि क्षेत्र की ये गिरावट इसलिए देश के लिए चिंता की खबर है क्योंकि आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों के दाम और बढ़ने की आशंका मज़बूत हो गई है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के ये आंकड़े कृषि के बेहद खराब प्रदर्शन को दिखा रहे हैं।
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कृषि के अलावा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ रेट भी एक साल में 7.7 फीसदी से घटकर 7 फीसदी, कंस्ट्रक्शन सेक्टर की विकास दर 4.3 से घटकर 2.6 फीसदी, फाइनेंशियल सर्विसेज की ग्रोथ रेट 7 फीसदी से घटकर 6.7 फीसदी औऱ रक्षा, जन प्रशासन की विकास दर 9.5 फीसदी से घटकर 6 फीसदी हो गई है। ये वो सेक्टर हैं, जिनसे रोजगार सृजन होता है।
ऐसे में सवा साल बाद आर्थिक मोर्चे पर जीडीपी के पहली बार बढ़ने की अच्छी खबर देश की अर्थव्यवस्था से ज्यादा सरकार के लिए अच्छी खबर है। हालांकि वित्तमंत्री अरुण जेटली का ये कहना कि नोटबंदी और जीएसटी का असर खत्म हो चुका है और ग्रोथ रेट आने वाले समय में बढ़ेगी, इसका इंतजार करना बेहतर होगा। पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने भी कहा है कि विकास दर पर निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तीन-चार तिमाही औऱ इंतजार करना होगा।
वेब डेस्क, IBC24