शुभेंदु की प्रशासनिक बैठक में शामिल हुए ममता के वफादार, तृणमूल कांग्रेस में फूट के संकेत

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शुभेंदु की प्रशासनिक बैठक में शामिल हुए ममता के वफादार, तृणमूल कांग्रेस में फूट के संकेत

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  • Publish Date - June 3, 2026 / 04:39 PM IST,
    Updated On - June 3, 2026 / 04:39 PM IST

कोलकाता, तीन जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई प्रशासनिक समीक्षा बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

इस घटनाक्रम को विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब तक के सबसे बड़े आंतरिक विद्रोह का सामना कर रही मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल के भीतर एक नए राजनीतिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

तृणमूल विधायक दल में संभावित विभाजन की आहट के बीच ममता बनर्जी की पुरानी वफादार मानी जाने वाली विधायक नयना बंदोपाध्याय, कोलकाता के महापौर फिरहाद हकीम, अशोक देव और कुणाल घोष राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में आयोजित इस प्रशासनिक बैठक में शामिल हुए।

यह घटनाक्रम तृणमूल के 58 असंतुष्ट विधायकों द्वारा पार्टी से निष्कासित विधायक रिताब्रत बनर्जी को विधायक दल का नया नेता चुनने और इस फैसले से विधानसभा अध्यक्ष रतींद्र बोस को औपचारिक रूप से अवगत कराने के कुछ ही घंटों बाद सामने आया है।

सदन में विपक्षी खेमे के शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदलने वाले एक कदम के तहत, रिताब्रत बनर्जी ने बागी विधायक संदीपन साहा और अन्य असंतुष्ट विधायकों के साथ विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और 58 विधायकों के हस्ताक्षर वाले समर्थन पत्र सौंपे।

बागी गुट ने एक नए नेतृत्व ढांचे का भी प्रस्ताव रखा है, जिसमें रिताब्रत बनर्जी को विपक्षी विधायक दल का नेता, जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को उपनेता तथा रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां को मुख्य सचेतक नामित किया गया है।

विशेष बात यह रही कि रिताब्रत बनर्जी, जावेद खान और साहा को भी मुख्यमंत्री की प्रशासनिक बैठक में भाग लेते देखा गया।

यह पूरा घटनाक्रम दिन में विधानसभा परिसर में असंतुष्ट विधायकों की बैठक के बाद शुरू हुआ।

महत्वपूर्ण बात यह है कि बागियों की इस बैठक में शामिल होने वाले विधायकों में से कोई भी मंगलवार को मध्य कोलकाता में ममता बनर्जी के धरने में नजर नहीं आया था, जो पार्टी के पारंपरिक नेतृत्व और असंतुष्ट गुट के बीच बढ़ती खाई को साफ दर्शाता है।

दिलचस्प बात यह रही कि हकीम, बंदोपाध्याय, देव और घोष सहित कालीघाट (ममता बनर्जी के आवास) खेमे से जुड़े कई नेताओं ने विधानसभा में हुई बागियों की बैठक से दूरी बनाए रखी, लेकिन वे मुख्यमंत्री की प्रशासनिक बैठक में जरूर पहुंचे।

इससे कुछ ही दिन पहले, वरिष्ठ तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार और पार्टी के छह विधायकों ने कल्याणी में शुभेंदु अधिकारी द्वारा बुलाई गई प्रशासनिक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया था, जिससे विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद विपक्षी खेमे के भीतर बदलते समीकरणों को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई थी।

भाषा सुमित सुरेश

सुरेश