नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) केरल में 2024 में सामने आए एमपॉक्स के मामलों का मुख्य रूप से संबंध संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से होने वाली अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से पाया गया है। आनुवंशिक विश्लेषण से यह जानकारी मिली।
एमपॉक्स, जिसे पहले मंकीपॉक्स कहा जाता था, एक वायरल बीमारी है जो मंकीपॉक्स वायरस से होती है। इसके आम लक्षणों में त्वचा पर दाने शामिल हैं, जो दो से चार हफ्तों तक रह सकते हैं। इसके अलावा बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों या पीठ में दर्द, थकान जैसी दिक्कतें भी होती हैं।
पुणे स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (आईसीएमआर-एनआईवी) के वैज्ञानिकों सहित शोधकर्ताओं ने सितंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच सामने आए एमपॉक्स वायरस (एमपीएक्सवी) के क्लेड-आईबी स्ट्रेन के 10 पुष्ट मामलों का विश्लेषण किया।
शोध पत्रिका ‘वायरोलॉजी’ में प्रकाशित क्लेड-आईबी स्ट्रेन की क्लिनिकल और जीनोमिक विशेषताओं के पहले विस्तृत विश्लेषण के निष्कर्षों में पाया गया कि 10 में से सात लोगों ने यूएई की यात्रा की थी।
शोधकर्ताओं ने कहा, ‘‘केरल से सितंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच एमपॉक्स क्लेड-आईबी के कुल 10 मामले सामने आए। इनमें से 70 प्रतिशत लोग पूर्व में संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा कर चुके थे, जबकि एक व्यक्ति ओमान से यात्रा कर आया था और एक अन्य संपर्क में आने से संक्रमित हुआ था।’’
एमपीएक्सवी क्लेड-आईबी का पहला मामला सितंबर 2023 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में सामने आया था। इसके बाद यह वायरस अफ्रीकी महाद्वीप के युगांडा, रवांडा, केन्या और बुरुंडी समेत अन्य देशों में भी फैल गया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 14 अगस्त 2024 को क्लेड-आईबी स्ट्रेन के तेज़ी से फैलने और बीमारी की गंभीरता को देखते हुए एमपॉक्स के प्रकोप को आपात स्थिति घोषित किया। अफ्रीका के बाहर, क्लेड-आईबी स्ट्रेन सबसे पहले स्वीडन में पाया गया, और इसके बाद ब्रिटेन, भारत, अमेरिका और चीन में भी इसकी मौजूदगी मिली।
शोधकर्ताओं ने कहा कि 2025 की शुरुआत तक क्लेड-आईबी के कारण दुनिया भर में एमपॉक्स के 22,000 से अधिक पुष्ट या संदेहास्पद मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 60 से अधिक मौतें इस क्लेड से जुड़ी हैं। इनमें से ज्यादातर मौतें कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में हुईं।
भाषा आशीष माधव
माधव