नयी दिल्ली, 28 जून (भाषा) केंद्र सरकार सोमवार को समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (एसएसबीएसके) शुरू करेगी।
इस एकीकृत बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में पहली बार जोखिम-आधारित दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है, जिसके तहत जोखिम की संभावना वाले नवजात शिशुओं और बच्चों की विशेष निगरानी और सघन अनुवर्ती देखभाल की जाएगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत नवजात शिशुओं के जन्म के बाद पहले 42 दिनों में घर पर अधिकतम नौ बार स्वास्थ्यकर्मी जाएंगे, जबकि जोखिमग्रस्त बच्चों के लिए 36 माह की आयु तक अधिकतम आठ घरेलू दौरे किए जाएंगे।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा इस कार्यक्रम का आरंभ विज्ञान भवन में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) के 16वें सम्मेलन में करेंगे।
यह कार्यक्रम मौजूदा ‘होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर’ (एचबीएनसी) और ‘होम-बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड’ (एचबीवाईसी) पहलों को एकीकृत कर जन्म से 36 माह तक बच्चों की निरंतर देखभाल सुनिश्चित करेगा।
मंत्रालय ने कहा कि यह कार्यक्रम ‘पहले तीन साल, संपूर्ण देखभाल’ की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें बच्चे के जीवन के शुरुआती तीन वर्षों को उसकी उत्तरजीविता, पोषण, शारीरिक विकास और प्रारंभिक मस्तिष्क विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मंत्रालय ने कहा, ‘पहली बार इस कार्यक्रम में ‘जोखिमग्रस्त’ नवजात शिशुओं और बच्चों के लिए जोखिम-आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।’
मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (एसएसबीएसके) की शुरुआत ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में प्रत्येक मां और बच्चे के लिए सुलभ, समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।’
भाषा
राखी नेत्रपाल राजकुमार
राजकुमार