कोहिमा, 11 जुलाई (भाषा) राइजिंग पीपुल्स पार्टी (आरपीपी) का शनिवार को सत्तारूढ़ नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) में औपचारिक विलय हो गया।
इस मौके पर एनपीएफ प्रमुख तथा राज्य के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने कहा कि नगा राजनीतिक मुद्दे का समाधान उनकी पार्टी की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने सभी क्षेत्रों के नगा लोगों से एकजुट होने की भी अपील की।
आरपीपी का गठन दो अक्टूबर 2020 को हुआ था और इसे जून 2021 में भारत निर्वाचन आयोग से मान्यता मिली थी। जोएल नगा के नेतृत्व वाली इस पार्टी ने खुद को एक क्षेत्रीय विकल्प के रूप में पेश किया था और स्वच्छ शासन तथा चुनावी सुधार जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ा था।
हालांकि, पार्टी 2023 के नगालैंड विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी। फिलहाल 60 सदस्यीय राज्य विधानसभा और राज्य के किसी भी शहरी स्थानीय निकाय में उसका कोई प्रतिनिधि नहीं है।
आरपीपी नेताओं का एनपीएफ में स्वागत करने के बाद रियो ने कहा कि यह विलय केवल दो राजनीतिक दलों का एक होना नहीं है, बल्कि नगा लोगों के व्यापक हित में ‘‘लोगों, विचारों, अनुभवों और आकांक्षाओं का मिलन’’ है।
उन्होंने कहा कि नगालैंड में विपक्ष रहित सरकार इस बात का प्रतीक है कि सभी निर्वाचित विधायक नगा राजनीतिक मुद्दे के समाधान के लिए मिलकर काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा एनपीएफ और पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) सरकार, दोनों की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
रियो ने कहा, ‘‘नगा राजनीतिक मुद्दा नगा पीपुल्स फ्रंट और पीडीए सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बना हुआ है।’’
उन्होंने कहा कि पार्टी दशकों पुराने नगा राजनीतिक विवाद के जल्द समाधान के लिए अनुकूल माहौल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी।
रियो ने कहा कि नगा लोग कई पीढ़ियों से समाधान का इंतजार कर रहे हैं और वे ‘‘समावेशी, सम्मानजनक और सभी को स्वीकार्य’’ राजनीतिक समाधान चाहते हैं।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि एनपीएफ लोगों की सामूहिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखेगी।
विलय के बाद आरपीपी के अध्यक्ष जोएल नगा के नेतृत्व में पार्टी के कुछ नेताओं को एनपीएफ के केंद्रीय पदाधिकारियों के रूप में अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
भाषा जोहेब नेत्रपाल
नेत्रपाल