वरिष्ठ नेताओं, नौकरशाहों के नाम लेने से मलिक को दोषमुक्त नहीं किया जा सकता: एनआईए ने अदालत से कहा

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वरिष्ठ नेताओं, नौकरशाहों के नाम लेने से मलिक को दोषमुक्त नहीं किया जा सकता: एनआईए ने अदालत से कहा

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  • Publish Date - April 22, 2026 / 06:40 PM IST,
    Updated On - April 22, 2026 / 06:40 PM IST

नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि वरिष्ठ नेताओं और नौकरशाहों के नाम लेने से अलगाववादी नेता यासीन मलिक को दोषमुक्त नहीं किया जा सकता है और न ही हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों के साथ उसके संबंधों को नकारा जा सकता है।

आतंकी वित्तपोषण मामले में मलिक की आजीवन कारावास की सजा को मृत्युदंड में बदलने की याचिका पर एनआईए ने मलिक के जवाब में एक प्रत्युत्तर (रिज्वाइंडर) दाखिल किया।

एजेंसी ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) का प्रमुख ‘‘कई आतंकवादी संगठनों और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के समर्थकों के साथ पूरी तरह से जुड़ा हुआ है’’ और उसने लोकप्रियता तथा जनता की सहानुभूति हासिल करने के लिए वरिष्ठ नेताओं, मीडियाकर्मियों, विदेशी प्रतिनिधियों और नौकरशाहों के नाम लिये।

एनआईए ने कहा कि मलिक को इस मामले को फिर से उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि उसके खिलाफ लगे आरोपों के परिणामस्वरूप उसे दोषी ठहराया जा चुका है और उसे आपत्तियां दर्ज कराने के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया था।

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र दुदेजा की पीठ ने एनआईए के प्रत्युत्तर को रिकॉर्ड में दर्ज किया और एजेंसी की अपील पर सुनवाई की तिथि 21 जुलाई तय की।

मलिक तिहाड़ जेल से ऑनलाइन ढंग से मामले की सुनवाई में पेश हुए। पीठ ने मलिक को बताया कि जेल अधिकारियों के माध्यम से उन्हें जवाब की एक प्रति उपलब्ध कराई जायेगी।

एनआईए ने कहा, ‘‘दोषी ने स्वयं स्वीकार किया है कि वह जेकेएलएफ का ‘कमांडर-इन-चीफ’ था। (जवाब में) वरिष्ठ नेताओं, मीडियाकर्मियों, विदेशी प्रतिनिधियों और नौकरशाहों के नाम लेने से संबंधित बाकी बातें केवल लोकप्रियता हासिल करने और जनता की सहानुभूति बटोरने के लिए हैं और इनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। बहुत विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया जाता है कि वरिष्ठ नेताओं और वरिष्ठ नौकरशाहों के नामों का मात्र उल्लेख करने से दोषी ठहराए गए लोगों के आतंकवादी हाफिज सईद और अन्य आतंकवादियों के साथ संबंधों को नकारा नहीं जा सकता है।’’

इसने कहा, ‘‘यासीन मलिक ने स्वीकार किया है कि वह जेकेएलएफ का ‘कमांडर-इन-चीफ’ था और उसने खुद यह बात मानी है कि उसके हिज्ब-उल-मुजाहिदीन के प्रमुख सईद सलाउद्दीन से संबंध थे।’’

एनआईए ने अपने जवाब में मलिक द्वारा खुद को ‘‘बलि का बकरा’’ बताये जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे बयान न्यायिक प्रक्रिया के लिए अनुचित हैं।

एनआईए ने कहा कि मलिक के खिलाफ मामला सबूतों पर आधारित है, न कि सुनी-सुनाई बातों या ‘‘भावनात्मक बयानों’’ पर। उसने कहा कि ऐसे सबूत मौजूद हैं जो यह दर्शाते हैं कि वह ‘‘पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व, जिसमें प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, पाकिस्तानी सीनेट के सीनेटर और सभी प्रांतों के मुख्यमंत्री शामिल हैं, के संपर्क में था और इन संपर्कों का इस्तेमाल वह भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने और जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा था’’।

दिल्ली की एक निचली अदालत ने 24 मई, 2022 को मलिक को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत विभिन्न अपराधों का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

एनआईए ने 2023 में उच्च न्यायालय में अपील दायर कर उसकी आजीवन कारावास की सजा को अधिकतम सजा यानी मृत्युदंड में बदलने का अनुरोध किया था।

भाषा

देवेंद्र रंजन

रंजन