कांग्रेस ने दिल्ली के जंतर-मंतर रोड स्थित अपने पूर्व मुख्यालय के बैनामा को लेकर अदालत का रुख किया

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कांग्रेस ने दिल्ली के जंतर-मंतर रोड स्थित अपने पूर्व मुख्यालय के बैनामा को लेकर अदालत का रुख किया

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  • Publish Date - May 14, 2026 / 05:29 PM IST,
    Updated On - May 14, 2026 / 05:29 PM IST

नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस की उस याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार से बृहस्पतिवार को जवाब मांगा जिसमें यहां सात, जंतर-मंतर रोड स्थित पार्टी के पूर्व मुख्यालय के लिए उसके पक्ष में बैनामा लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने याचिका और अंतरिम राहत के लिए दायर आवेदन पर सरकारों को नोटिस जारी कर दोनों पहलुओं पर उनसे जवाब मांगा है।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने अदालत से अंतरिम आदेश पारित करने का आग्रह किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस बीच परिसर किसी और को आवंटित न कर दिया जाये।

वहीं, न्यायमूर्ति कौरव ने याचिका की विचारणीयता पर सवाल उठाया।

न्यायमूर्ति कौरव ने कहा, ‘‘मुझे इसके सुनवाई योग्य होने पर संदेह है। इसलिए यदि आप अंतरिम राहत के लिए आग्रह करना चाहते हैं, तो आपको यह साबित करना होगा कि यह याचिका सुनवाई योग्य है। देखिए सरकार का क्या जवाब आता है। शायद आपको एक दीवानी वाद दायर करना पड़े।’’

सिंघवी ने कहा कि याचिकाकर्ता पक्ष संपत्ति का आवंटन पाने वाला है और दशकों से संपत्ति पर उसका कब्जा है, लेकिन प्राधिकरण ने अभी तक उसके पक्ष में बैनामा निष्पादित करने के अनुरोध पर कोई कदम नहीं उठाया है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं बार-बार संपत्ति हस्तांतरण विलेख निष्पादित करने का अनुरोध कर रहा हूं। न तो इनकार हुआ, न ही कोई जवाब मिला। मेरे पास 70 वर्षों से कब्जा है। मेरे पास सब कुछ है – सारे दस्तावेज, भुगतान संबंधी कागजात। उन्हें इसे किसी और को आवंटित नहीं करना चाहिए।’’

याचिका में कांग्रेस पार्टी ने कहा कि दिल्ली सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार, वह फरवरी 1946 से संपत्ति के एक हिस्से पर कब्जा किए हुए है और 1956 में उसके पक्ष में एक आवंटन किया गया था।

इसमें कहा गया कि 1959 में, पार्टी ने बिक्री मूल्य के रूप में भारत सरकार को 6.1 लाख रुपये का भुगतान किया, इसके अलावा उपयोग में परिवर्तन के लिए अतिरिक्त प्रीमियम और अतिरिक्त भूमि किराए के रूप में प्रतिवर्ष 96,962 रुपये और 4,849 रुपये का भुगतान किया।

याचिका में कहा गया है कि हालांकि, पार्टी के पक्ष में बैनामा के निष्पादन में कई कारणों से देरी हुई।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 14 सितंबर तय की।

भाषा

देवेंद्र माधव

माधव