नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने द्वारका इलाके में एक विशाल खेल परिसर, स्टेडियम, क्लब और अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के साथ करार करने वाली रियल एस्टेट कंपनी द्वारा पेड़ों की अवैध कटाई सहित अन्य पर्यावरणीय उल्लंघनों पर बुधवार को चिंता जताई।
एनजीटी ने अधिकारियों को पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करने और उचित दंडात्मक एवं उपचारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
अधिकरण ‘ओमेक्स लिमिटेड’ की सहायक कंपनी ‘वर्ल्डस्ट्रीट स्पोर्ट्स सेंटर लिमिटेड’ द्वारा द्वारका के सेक्टर-19बी इलाके में ‘द ओमेक्स स्टेट’ के निर्माण के दौरान पर्यावरणीय उल्लंघनों का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने इस बात पर गौर किया कि डीडीए ने द्वारका के सेक्टर-19बी में एक एकीकृत बहु-खेल परिसर विकसित करने का फैसला लिया है, जिसमें एक ‘आउटडोर’ और एक ‘इनडोर’ स्टेडियम, एक स्पोर्ट्स क्लब और अन्य खेल सुविधाएं शामिल होंगी।
उसने कहा कि जुलाई 2022 में हुए करार के तहत ‘वर्ल्डस्ट्रीट स्पोर्ट्स सेंटर लिमिटेड’ को डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) आधार पर एकीकृत बहु-खेल मैदान और वाणिज्यिक सुविधाओं के निर्माण के लिए विकास अधिकार प्रदान किए गए थे, लेकिन कंपनी को परियोजना को पूरा करते समय कानूनों का पालन करना था।
पीठ ने कहा, “मौजूदा मामले में विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) की ओर से की गई सिफारिश सशर्त थी, जिसमें खास तौर पर इस बात का जिक्र किया गया था कि प्रस्तावित परियोजना में 1,965 पेड़ काटे जाएंगे और यह विशिष्ट शर्त लगाई गई थी कि राज्य वन विभाग की अनुमति के बिना कोई भी पेड़ नहीं काटा जाएगा।”
एनजीटी ने ‘डीम्ड क्लीयरेंस’ हासिल करने के रियल एस्टेट कंपनी के दावे को खारिज करते हुए कहा, “परियोजना के प्रस्तावक ने पेड़ों की कटाई से पहले वन विभाग की मंजूरी हासिल होने के संबंध में कोई प्रमाण रिकॉर्ड में नहीं रखा है।”
‘डीम्ड क्लीयरेंस’ एक कानूनी प्रावधान है, जिसके तहत अगर कोई नियामक प्राधिकरण निर्धारित समय के भीतर किसी आवेदन पर प्रतिक्रिया देने में विफल रहता है, तो संबंधित अनुमोदन स्वतः ही प्रदान किया गया मान लिया जाता है।
एनजीटी ने कहा, “रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री पेड़ों की अवैध कटाई की ओर इशारा करती है, इसलिए परियोजना के प्रस्तावक ने ईएसी की सिफारिश का उल्लंघन किया है।”
अधिकरण ने कहा कि कंपनी ने निर्माण कार्य शुरू करने के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी (ईसी) के बिना पेड़ों की कटाई करके पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन किया है।
उसने कहा कि कंपनी ने पेड़ काटने से भले ही इनकार किया है, लेकिन उपग्रह से प्राप्त चित्रों से पेड़ों की अवैध कटाई का संकेत मिला है।
एनजीटी ने कहा, “इसलिए संबंधित वृक्ष संरक्षण अधिकारी या जिला वन अधिकारी को तत्काल मौके का मुआयना करने, उपग्रह चित्रों को ध्यान में रखते हुए पेड़ों की अवैध कटाई के स्तर का पता लगाने और कानून के अनुसार उचित उपचारात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई करने की आवश्यकता है।”
अधिकरण ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को उल्लंघनों पर विचार करने के बाद ईसी के संबंध में उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।
एनजीटी ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) से आठ हफ्ते के भीतर उचित दंडात्मक और उपचारात्मक उपाय करने को कहा।
अधिकरण ने कहा, “वृक्ष संरक्षण अधिकारी और डीपीसीसी के सदस्य सचिव तीन महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करेंगे। अगर जरूरी समझा गया, तो मामले को फिर से पीठ के समक्ष विचार के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।”
भाषा पारुल अविनाश
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