स्वत: संज्ञान लेने के अधिकार का अधिक सक्रियता से इस्तेमाल करे एनजीटी : संसदीय समिति

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स्वत: संज्ञान लेने के अधिकार का अधिक सक्रियता से इस्तेमाल करे एनजीटी : संसदीय समिति

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  • Publish Date - August 25, 2026 / 05:12 PM IST,
    Updated On - August 25, 2026 / 05:12 PM IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) संसद की एक समिति ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से कहा है कि वह राजमार्गों के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई, अवैध रेत खनन और राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण जैसे गंभीर पर्यावरणीय मुद्दों पर स्वत: संज्ञान लेने के अपने अधिकार का ज्यादा सक्रियता से इस्तेमाल करे।

समिति ने अधिकरण और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा नियमित कार्रवाई रिपोर्ट के माध्यम से मामलों की मजबूत निगरानी, संयुक्त समितियों के प्रभावी इस्तेमाल, जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय करने और एनजीटी के आदेशों को समयबद्ध तरीके से लागू कराने के बेहतर उपाय करने की सिफारिश भी की है।

विधि एवं कार्मिक मामलों संबंधी विभाग से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने ‘देश में अधिकरण प्रणाली के कामकाज की समीक्षा’ विषय पर अपनी रिपोर्ट इस महीने की शुरुआत में दोनों सदनों में पेश की थी।

समिति ने कहा कि अधिकरण को दिल्ली और गंगा के मैदानी क्षेत्रों में गंभीर वायु प्रदूषण, नदी तटों पर अवैध रेत खनन, नदियों का प्रदूषण, राजमार्गों के लिए पेड़ों की कटाई और सड़कों के किनारे लगे देशज पेड़-पौधों के नुकसान, महानगरों में अनियंत्रित ऊंची इमारतों के निर्माण, पूर्वोत्तर राज्यों में प्रदूषण और पारिस्थितिक जोखिम तथा पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में खनन जैसे ‘‘गंभीर पर्यावरणीय मुद्दों’’ पर अपने स्वत: संज्ञान लेने के अधिकार का ‘‘अधिक सक्रियता से’’ इस्तेमाल करना चाहिए।

हरित अधिकरण के आदेशों के अनुपालन को मजबूत करने के संबंध में समिति ने कहा कि संबंधित प्राधिकरणों द्वारा इन आदेशों के पालन की अधिक करीबी निगरानी की जानी चाहिए।

वर्ष 2010 में स्थापित एनजीटी पर्यावरण संरक्षण, वनों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के प्रभावी और त्वरित निपटारे के लिए गठित एक विशेष निकाय है।

भाषा हक हक दिलीप

दिलीप