नयी दिल्ली, पांच जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने नीतीश कटारा हत्याकांड मामले में दोषी विकास यादव की फर्लो की मांग वाली याचिका पर सोमवार को फैसला सुरक्षित रखा।
विकास यादव 2002 में कारोबारी नीतीश कटारा की हत्या के आरोप में 25 साल की जेल की सजा काट रहा है।
दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा ने याचिका पर आदेश पारित करने की बात कही। न्यायालय ने कहा कि दोनों पक्ष इस मामले में लिखित दलीलें दाखिल करने के लिए स्वतंत्र हैं।
इससे पहले अदालत ने दिल्ली सरकार, जेल अधिकारियों, कटारा की मां नीलम कटारा और गवाह अजय कटारा को नोटिस जारी कर याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा था।
विकास यादव ने जेल अधिकारियों द्वारा 29 अक्टूबर, 2025 को दिए गए आदेश को चुनौती दी है जिसमें उसकी फर्लो अर्जी खारिज कर दी गई है।
विकास का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने बताया था कि दोषी व्यक्ति (विकास) ने हाल ही में शादी की है और इसलिए वह सामाजिक संबंध बनाए रखने के लिए 21 दिनों की अवधि के लिए पहली बार फर्लो की मांग कर रहा है।
वकील ने यह तर्क दिया कि अधिकारियों ने दिल्ली कारागार नियमों के तहत सभी मानदंडों को पूरा करने के बावजूद बिना विचार किए विकास की याचिका खारिज कर दी।
उन्होंने कहा कि दोषी को केवल इस आधार पर फर्लो (कुछ दिनों की छुट्टी) देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह एक निश्चित अवधि के कारावास की सजा काट रहा है या अपराध की प्रकृति ऐसी है।
फर्लो का मतलब जेल से अस्थायी रिहाई है, न कि पूरी सजा का निलंबन या माफी, और यह आमतौर पर उन दीर्घकालिक कैदियों को दी जाती है जिन्होंने अपनी सजा का एक हिस्सा पूरा कर लिया है।
उच्च न्यायालय ने सितंबर 2025 में विकास की अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने की याचिका को खारिज कर दिया था।
विकास को अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा अंतरिम जमानत दी गई थी। विकास उत्तर प्रदेश के राजनेता डी पी यादव का बेटा है। उसके चचेरे भाई विशाल यादव को भी कटारा के अपहरण और हत्या के मामले में सजा मिली थी।
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