Odisha Naxal Free State || Image- IBC24 NEWS File
भुवनेश्वर: देश के दूसरे राज्यों की तरफ माओवाद से प्रभावित ओड़िशा राज्य भी नक्सल गतिविधियों से मुक्त होने की दिशा में है। (Odisha Naxal Free State) इस बारें में बात करते हुए ओडिशा में नक्सल-विरोधी अभियानों के अतिरिक्त महानिदेशक संजीव पांडा ने मंगलवार को कहा कि राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद को रोकने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।
न्यूज एजेंसी से बात करते हुए पांडा ने बताया, “ओडिशा पुलिस ने ओडिशा से नक्सली खतरे को खत्म करने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस सफलता के लिए मैं एसओजी, सीआरपीएफ, बीएसएफ और हमारी खुफिया शाखा को उनके अथक परिश्रम और समर्पण के लिए बधाई देता हूं। 2025-26 में सुरक्षा बलों ने 27 नक्सलियों को मार गिराया, जिनमें गरियाबंद के 17 नक्सली शामिल हैं । 78 नक्सलियों ने ओडिशा पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया और 42 नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के समक्ष आत्मसमर्पण किया। राज्य के 8 जिलों को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है। पिछले 15 महीनों में हमने राज्य में अपने तंत्र से 156 नक्सलियों को खदेड़ दिया है।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं इस दिशा-निर्देश और समर्थन के लिए हमारे मुख्यमंत्री का आभारी हूं। (Odisha Naxal Free State) नक्सलवाद के खिलाफ इस लड़ाई में 239 सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई। अब कंधमाल जिले में मुट्ठी भर नक्सली ही बचे हैं।”
#WATCH भुवनेश्वर, ओडिशा: ADG(नक्सल विरोधी अभियान) संजीव पांडा ने कहा, “ओडिशा पुलिस ओडिशा से नक्सल खतरे को खत्म करने में बेहद सफल रही है और इस सफलता के लिए मैं हमारे सुरक्षा बलों, SOG, CRPF और BSF को उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण के लिए बधाई देता हूं। 2025 की शुरुआत में 9 जिले माओवादी… pic.twitter.com/205jZDsqgc
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 31, 2026
लोकसभा में नियम 193 के तहत नक्सलवाद से देश को मुक्त कराने के प्रयासों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों और उनके समर्थकों ने निर्दोष आदिवासियों के सामने एक झूठा नैरेटिव पेश किया है कि वे उनके अधिकारों के लिए और उन्हें न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह से समाप्त हो चुका है और वहां के हर गांव में स्कूल बनाने और राशन की दुकानें खोलने का अभियान शुरू हो गया है। “नक्सल मुक्त भारत” मिशन मोदी सरकार के नेतृत्व में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 31 मार्च, 2026 तक वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) को समाप्त करने के लिए निर्धारित एक रणनीतिक लक्ष्य है।
आज 31 मार्च है और वादे के मुताबिक़ माओवाद का आखिर दिन है। अपने इस अंतिम दिनों में माओवाद की कमर टूट चुकी है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश पहले ही नक्सल मुक्त हो चुके है। बात छत्तीसगढ़ की ही करें तो यहाँ नक्सलियों की टॉप लीडरशिप को पूरी तरह से ख़त्म किया जा चुका है, जबकि कई नेताओं ने हथियार भी डाल दिए है। इस बीच कांकेर जिले से खबर आई है कि, दो माओवादियों ने हथियार समेत पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। वे अपने साथ दो एके-47 हथियार लेकर पहुंचे थे। दोनों ने एसपी निखिल राखेचा को अपने हथियार सौंपे और समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए।
बात करें सुकमा जिले के तो यहां भी दो नक्सलियों ने 6 ऑटोमैटिक हथियारो के साथ आत्मसमर्पण किया है। (Odisha Naxal Free State) वे अपने साथ दो AK47, LMG तीन 303 हथियार पहुंचे थे। नक्सलियों के निशानदेही पर पुलिस ने 10 लाख रुपये डम्प कैश भी कर लिया है। इसकी पुष्टि खुद जिले के एसपी किरण चव्हाण ने की है।
#WATCH | Chhattisgarh: 2 naxals surrendered before Kanker SP Nikhil Rakhecha, along with AK-47 weapon.
(Video source: SP Kanker) pic.twitter.com/9DZlXgelkm
— ANI (@ANI) March 31, 2026
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