पहलगाम हमले की पहली बरसी पर विभिन्न दलों के नेताओं ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की

Ads

पहलगाम हमले की पहली बरसी पर विभिन्न दलों के नेताओं ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की

  •  
  • Publish Date - April 22, 2026 / 05:02 PM IST,
    Updated On - April 22, 2026 / 05:02 PM IST

श्रीनगर/जम्मू, 22 अप्रैल (भाषा) विभिन्न राजनीतिक दलों ने बुधवार को पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि यह हमला एक ऐसा घाव है जिसका निशान हमेशा रहेगा।

पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने पिछले वर्ष इसी दिन जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हमला किया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। इनमें अधिकतर पर्यटक थे।

सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने पहलगाम हमले की बरसी पर कहा, ‘‘इस दुखद घटना ने न केवल हमारे दिलों को दुखी किया, बल्कि हमारी आंखों में आंसू ला दिए। इसने हर कश्मीरी को पीड़ा पहुंचाई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लोगों की ओर से एक ही संदेश आया कि पूरा कश्मीर शोक में डूबा हुआ है। लोग हर जगह सड़कों पर उतरे, कैंडल लाइट जुलूस निकाले गए और इस भयावह हमले की सभी ने एक सुर में निंदा की।’’

जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हमले को याद करते हुए पीड़ा की भावना निरंतर बनी हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘जब संस्थाओं में सार्थक अधिकार का अभाव होता है और नागरिक लगातार सुरक्षा संबंधी चिंताओं के साये में जीते हैं, तो लोकतंत्र धूमिल प्रतीत होता है। यह धारणा बढ़ती जा रही है कि शासन व्यवस्था पहले से तैयार रहने के बजाय घटना होने के बाद कदम उठाती है।’’

इस बीच, भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में इस दिन को ‘काला दिवस’ ​​के रूप में मनाने के लिए एक रैली निकाली।

भाजपा नेता और पूर्व एमएलसी सोफी यूसुफ ने पत्रकारों से कहा, ‘‘आज उस भयावह नरसंहार की पहली बरसी है। हम शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके परिवारों के साथ खड़े हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान को दिखा दिया है कि अगर उसने कुछ भी किया, तो हम उसे करार जवाब देंगे।’’

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने कहा, ‘‘हम पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता के साथ मिलकर उन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्रित हुए हैं जिन्होंने समाज के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यद्यपि हम पहले हमला नहीं करते, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर हम अपनी रक्षा करना जानते हैं।’’

भाषा शफीक मनीषा

मनीषा