देश में केवल 50 प्रतिशत सीवेज शोधन संयंत्र ही मानकों का पालन कर रहे : समिति

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देश में केवल 50 प्रतिशत सीवेज शोधन संयंत्र ही मानकों का पालन कर रहे : समिति

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  • Publish Date - August 4, 2026 / 09:09 PM IST,
    Updated On - August 4, 2026 / 09:09 PM IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) लोकसभा में मंगलवार को पेश की गई एक संसदीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में संचालित 1,044 सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) में से केवल 50 प्रतिशत ही वर्ष 2015 में अधिसूचित अपशिष्ट जल निकासी मानकों का पालन कर रहे हैं, जबकि वर्ष 2019 में निर्धारित कड़े मानकों पर केवल 15 प्रतिशत संयंत्र ही खरे उतरते हैं।

यह रिपोर्ट 24 मार्च को आयोजित आवास एवं शहरी कार्य संबंधी स्थायी समिति की बैठक में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा उपलब्ध की गई जानकारी पर आधारित है। समिति के अध्यक्ष मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी हैं।

रेड्डी ने ‘अमृत एवं अमृत 2.0 के तहत हस्तक्षेपों के विशेष संदर्भ में शहरों में सीवरेज एवं सेप्टेज कवरेज की समीक्षा’ विषय पर समिति की दसवीं रिपोर्ट लोकसभा में पेश की। यह समिति शहरी विकास विभाग, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से संबंधित है।

सीवेज शोधन संयंत्रों द्वारा मानकों के कम अनुपालन के संबंध में समिति के प्रश्न के उत्तर में मंत्रालय ने बताया कि उसने देशभर के एसटीपी का जमीनी स्तर पर आकलन करने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी से सर्वेक्षण कराया था।

मंत्रालय के अनुसार, सर्वेक्षण दल ने लगभग 27,97.4 करोड़ लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) की स्थापित क्षमता वाले 1,044 एसटीपी का दौरा किया। इनमें से संयंत्रों की वास्तविक परिचालन क्षमता लगभग 24,000 एमएलडी थी।

रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने बताया कि शोधित जल के नमूने लेकर यह जांच की गई कि संयंत्र जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी), रासायनिक ऑक्सीजन मांग (सीओडी) और मलजनित प्रदूषण से संबंधित निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

मंत्रालय ने समिति को बताया, ‘‘1,044 संयंत्रों का निरीक्षण किया गया। इसमें यह पाया गया कि केवल 50 प्रतिशत एसटीपी ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वर्ष 2015 के मानकों का पालन कर रहे थे। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के मानकों पर केवल 15 प्रतिशत संयंत्र ही खरे उतरते हैं।’’

मंत्रालय ने कहा, ‘एनजीटी के मानक बहुत कड़े हैं। वे लगभग पेयजल की गुणवत्ता के बराबर हैं।’

भाषा

सुभाष अविनाश

अविनाश