नयी दिल्ली, पांच जनवरी (भाषा) विपक्ष के कुछ नेताओं ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश मामले में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को उच्चतम न्यायालय द्वारा जमानत से इनकार किए जाने पर सोमवार को सवाल खड़े किए और कहा कि पांच साल से जेल में बंद लोगों को जमानत नहीं मिल रही, लेकिन बलात्कार के दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल दी जा रही है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद जॉन ब्रिटास ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “यह सिद्धांत कि ‘जमानत नियम है, जेल अपवाद’ कुछ खास व्यक्तियों के मामले में स्पष्ट रूप से लागू नहीं होता।”
ब्रिटास ने कहा, ‘‘उमर खालिद को कोई जमानत नहीं मिल रही, कठोर यूएपीए कानून के तहत 5 साल से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया है, जबकि मुकदमा अभी शुरू भी नहीं हुआ है।’’
उन्होंने कहा, ‘इस बीच, बलात्कार के दोषी और हत्यारे गुरमीत राम रहीम सिंह (2017 में सजा सुनाई गई) को अभी 40 दिन की और पैरोल दी गई है, सजा के बाद जेल से उनकी 15वीं अस्थायी रिहाई। एक को बिना मुकदमे के अनिश्चित काल तक जेल में रखा जाता है। दूसरे को बार-बार ‘जेल से छुट्टियों’ का आनंद मिलता है।’
माकपा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि जमानत से लगातार इनकार स्वाभाविक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उसने आरोप लगाया कि असहमति को कुचलने के लिए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) का इस्तेमाल किया जा रहा है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने कहा कि जमानत से इनकार करने से कुछ ”परेशान करने वाले सवाल” खड़े होते हैं।
उनका कहना था, ‘‘हालांकि यह सच है कि संवैधानिक अदालतों के पास ऐसे मामलों में जमानत देने की शक्ति है और वास्तव में उनका कर्तव्य भी है जहां कारावास अनावश्यक रूप से लंबा, अनुचित, हो जाता है। फिर भी, उमर खालिद और शरजील के मामले में न्यायिक दृष्टिकोण यह प्रतीत होता है कि जेल में पहले ही बिताया गया समय अभी भी पर्याप्त लंबा नहीं है और मुकदमे में देरी अभी भी चौंकाने वाली या असंवैधानिक नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘इससे परेशान करने वाले सवाल उठते हैं कि संवैधानिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने से पहले कितनी कैद सहनी होगी।’’
उच्चतम न्यायालय ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सोमवार को इनकार कर दिया लेकिन ‘‘भागीदारी के स्तर के क्रम’’ का हवाला देते हुए पांच अन्य को जमानत दे दी और कहा कि मामले में सभी आरोपी एक ही पायदान पर नहीं हैं।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि खालिद और इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। उसने कहा कि ये दोनों जेल में रहेंगे लेकिन अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी जाती है।
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हक नरेश
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