Pahalgam Attack Anniversary: ‘मेरे बेटे ने धर्म नहीं देखा’, पहलगाम हमले में बेटे को खोने वाले पिता छलका दर्द, कहा- परवाह न करते हुए दे दी जान’

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Pahalgam Attack Anniversary: 'मेरे बेटे ने धर्म नहीं देखा', पहलगाम हमले में बेटे को खोने वाले पिता छलका दर्द, कहा- परवाह न करते हुए दे दी जान'

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  • Publish Date - April 22, 2026 / 02:00 PM IST,
    Updated On - April 22, 2026 / 02:00 PM IST

Pahalgam Attack Anniversary | Photo Credit: IBC24

HIGHLIGHTS
  • 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था
  • इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत हुई थी
  • पहली बरसी पर पीड़ित परिवारों ने एकनाथ शिंदे का आभार जताया

नई दिल्ली: Pahalgam Attack Anniversary आज का दिन हर किसी को याद है, क्योंकि एक साल पहले आज ही के दिन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में एक आतंकी हमला (Pahalgam Attack) हुआ था। इस हमले में 26 निर्देष लोगों की जान चली गई थी। इस दिन को भले ही एक साल पूरा हो गया है, लेकिन यह दिन आज भी लोगों को याद आती है, जिसे सोचकर आज भी सिहरन दौड़ जाती है। आज से ठीक एक साल पहले पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले (Pahalgam Attack) में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को देश भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है। पहली बरसी पर हमले में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

Pahalgam Attack Anniversary इस बीच आदिल हुसैन के पिता सईद हैदर शाह ने कहा कि हम महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बहुत आभारी हैं। जब 22 अप्रैल 2025 में ये घटना हुए तो उस वक्त भी एकनाथ शिंदे के सारे लोग हमार साथ खड़े थे और आज भी पूरा साल होने के बाद भी साथ खड़े है और उन्होंने घर भी बनाकर दिया है साथ ही उन्होंने घर की जरूरतों का हर समान हमें दिया है। उन्होंने आगे कहा कि हम तो बहुत शुक्रगुजार है शिंदे साहब के।

बेटे को यादकर हुए भावुक

उन्होंने आगे कहा कि ‘आदिल ने जैसे इनसानियत को काबिल किया। एकनाथ शिंदे ने देखा कि आदिल ने इनसानियत कैसे कामय की। आदिल ने न तो हिंदू देखा और न ही मुसलमान, और अपनी जान की परवाह न करते हुए उन्होंने अपनी जान दे दी।

इन्हें भी पढ़े:-

पहलगाम आतंकी हमला कब हुआ था?

यह हमला 22 अप्रैल 2025 को हुआ था।

इस हमले में कितने लोग मारे गए थे?

इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी।

हमला कहाँ हुआ था?

हमला जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुआ था।