Pawan Khera Supreme Court Case: क्या भारी पड़ रहा पवन खेड़ा को हिमंता सरमा से पंगा?.. हाईकोर्ट के बाद अब सुको ने भी दिया झटका, बेल पिटीशन ख़ारिज करते हुए दी ये सलाह..
Pawan Khera Supreme Court Case: क्या भारी पड़ रहा पवन खेड़ा को हिमंता सरमा से पंगा?.. हाईकोर्ट के बाद अब सुको ने भी दिया झटका, बेल पिटीशन ख़ारिज करते हुए दी ये सलाह..
pawan khera news/ image source: IBC24 X HANDLE
- सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज ट्रांजिट
- जमानत बढ़ाने से इनकार
- असम कोर्ट में होगी सुनवाई
Pawan Khera Supreme Court Case: नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा पहले दी गई ट्रांजिट अग्रिम ज़मानत को मंगलवार तक बढ़ाने की मांग की थी। खेड़ा ने यह मांग इसलिए की थी ताकि वह असम में किसी भी अधिकार क्षेत्र वाले कोर्ट में इस मामले को लेकर संपर्क कर सकें। इस मामले में खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ झूठे आरोप लगाए थे।
यूपी : बागपत में “मटरू” लंगूर भरी मीटिंग में DM अस्मिता लाल के पास पहुंच गया। 2015 बैच की IAS अस्मिता एनिमल लवर हैं। मटरू उनका पेट एनिमल है और DM कार्यालय परिसर में ही घूमता रहता है। pic.twitter.com/gqWLDZadoA
— Sachin Gupta (@Sachingupta) April 17, 2026
Himanta Biswa Sarma controversy: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज
हालांकि, जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने अपने पिछले आदेश को स्पष्ट किया। उस आदेश में बेंच ने तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा खेड़ा को दी गई एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम ज़मानत पर रोक लगा दी थी। बेंच ने अब स्पष्ट किया है कि इस रोक का कोई भी प्रतिकूल प्रभाव उस अधिकार क्षेत्र वाले कोर्ट पर नहीं पड़ेगा, जो खेड़ा की याचिका पर फैसला सुनाएगा। कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि न तो हाई कोर्ट का वह आदेश, जिसने खेड़ा को राहत दी थी, और न ही सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश, जिसने उस राहत पर रोक लगाई थी—इनमें से कोई भी आदेश असम के उस कोर्ट के काम में बाधा नहीं बनेगा, जो इस मामले की सुनवाई करेगा और उस पर फैसला सुनाएगा।
Assam court legal update: पुराने आदेश का असर नहीं
कोर्ट ने कहा, “याचिका पर फैसला सुनाने वाला कोर्ट, ट्रांजिट ज़मानत देने वाले या किसी अन्य आदेश से किसी भी तरह से प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि जब सक्षम कोर्ट के समक्ष अग्रिम ज़मानत की याचिका दायर की जाएगी, तो वह कोर्ट किसी भी पिछले आदेश से प्रभावित हुए बिना, याचिका पर उसके अपने गुण-दोषों के आधार पर फैसला सुनाएगा। उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए, प्रतिवादी (खेड़ा) उचित कोर्ट से संपर्क करने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि कोर्ट काम नहीं कर रहा है, तो कोर्ट की रजिस्ट्री से अनुरोध किया जा सकता है, और रजिस्ट्री कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी। उपरोक्त टिप्पणियों के साथ, यह याचिका निस्तारित की जाती है।”
इन्हें भी पढ़े:-
‘मेडिकल टूरिज्म’ को बढ़ावा देने के लिए अपनी ‘बेड’ क्षमता विस्तार को तेज कर रहा है मैक्स
उप्र: राष्ट्र विरोधी गतिविधि में शामिल होने के आरोप में दो लोग गिरफ्तार, विदेशी संपर्क की जांच शुरू
चीन में कैथोलिक समुदाय पर बढ़ा दबाव, सरकारी गिरजाघर से जुड़ने को मजबूर : रिपोर्ट
ओलंपिक में कोविड-19 टीका लगाने का फर्जी प्रमाणपत्र देने वाला हॉकी कोच बर्खास्त
इजराइल और अमेरिका का लक्ष्य ‘एक जैसा’, हम किसी भी स्थिति के लिए तैयार: नेतन्याहू
आंध्र प्रदेश में सड़क दुर्घटना में आठ श्रद्धालुओं की मौत, मुख्यमंत्री नायडू ने शोक जताया

Facebook


