प्रधानमंत्री ने संसद में तर्क और तथ्यों के आधार पर चर्चा की उम्मीद जताई, सार्थक सत्र के लिए की अपील

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प्रधानमंत्री ने संसद में तर्क और तथ्यों के आधार पर चर्चा की उम्मीद जताई, सार्थक सत्र के लिए की अपील

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  • Publish Date - July 20, 2026 / 12:37 PM IST,
    Updated On - July 20, 2026 / 12:37 PM IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा कई विवादित मुद्दे उठाए जाने की संभावना के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि यदि सदन में चर्चा तर्क और तथ्यों के आधार पर होगी तो न तो हंगामे की जरूरत पड़ेगी और न ही ऊंची आवाज में बोलने की आवश्यकता होगी।

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले संवाददाताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के भारत पर पड़े प्रभाव और देश के तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष क्षेत्र का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि चाहे मौसमी मानसून हो या संसद का मानसून सत्र, यदि दोनों सक्रिय और सकारात्मक हों तो वे अत्यंत उत्पादक तथा सार्थक बनते हैं एवं देश के कल्याण में योगदान देते हैं।

मोदी ने कहा, ‘‘इसलिए हमारी प्रार्थना है कि मानसून सक्रिय रहे और संसद का मानसून सत्र उत्पादक एवं सार्थक रहे।’’

विपक्ष द्वारा राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी, नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक और ई-20 पेट्रोल जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग किए जाने की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सदन में चर्चा तर्क और तथ्यों के आधार पर होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि जहां तथ्य होते हैं, वहां हंगामे की जरूरत नहीं होती। यदि आपके तर्क और तथ्य मजबूत हैं तो ऊंची आवाज में बोलने की आवश्यकता नहीं है। संसद की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि हर आवाज को सुना जाए। मैं सभी सांसदों से आग्रह करता हूं कि वे सदन की कार्यवाही में पूरे मनोयोग से भाग लें।’’

पश्चिम एशिया संघर्ष का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ईंधन आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने कहा, ‘‘पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और उर्वरक जैसे हर क्षेत्र में अनेक बाधाएं और संकट उत्पन्न हुए। इसके बावजूद भारत 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। यह भारत की ताकत का परिचायक है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक महीने में देश ने कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं जिन पर देशवासियों को गर्व हो सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले वर्ष मानसून सत्र से ठीक पहले एक भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर था। दो दिन पहले भारतीय युवाओं के नेतृत्व वाले एक स्टार्टअप ने ऐसी बड़ी उपलब्धि हासिल की, जिसे दुनिया के केवल कुछ ही देश हासिल कर पाए हैं। इससे भारतीयों का आत्मविश्वास बढ़ा है और विश्व में भारत की प्रतिष्ठा मजबूत हुई है। यह संदेश है कि हमारे युवाओं की क्षमता और उनकी आकांक्षाएं अंतरिक्ष की तरह असीमित हैं।’’

मोदी ने कहा कि यह महज संयोग नहीं है, बल्कि यह इस बात का मजबूत संदेश है कि भारत के युवाओं की क्षमता और उनके सपनों की कोई सीमा नहीं है।

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले एक बड़ी तेल रिफाइनरी का लोकार्पण किया गया, एक सेमीकंडक्टर संयंत्र का उद्घाटन हुआ और भारत की पहली, हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन भी शुरू की गई, जिससे भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा इस ट्रेन में सबसे शक्तिशाली इंजन है और यह बिना रुके सबसे लंबी दूरी तय करने में सक्षम है। यह देश के नवप्रवर्तकों, इंजीनियरों और उद्यमियों द्वारा राष्ट्र के लिए कुछ नया करने के संकल्प का परिणाम है।’’

प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की सुधार संबंधी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कदमों ने युवाओं में साहस पैदा किया है और उन्हें उल्लेखनीय कार्य करने के लिए प्रेरित किया है।

भाषा मनीषा माधव

माधव