कोलकाता, छह मई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल में आधिकारिक तौर पर सत्ता संभालने से पहले ही चुनाव बाद हिंसा के खिलाफ एक स्पष्ट राजनीतिक और संगठनात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि वह राज्य में न तो इस तरह की हिंसा की अनुमति देगी और न ही पार्टी का “तृणमूलीकरण” होने देगी।
यह संदेश ऐसे समय में दिया गया, जब भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, केंद्रीय पर्यवेक्षक सुनील बंसल और पार्टी नेता ज्योतिर्मय महतो तथा सौमित्र खान के साथ राज्य सचिवालय ‘नाबन्न’ पहुंचे और मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की।
‘नाबन्न’ में प्रवेश करने से पहले भट्टाचार्य ने कई जिलों से सामने आई चुनाव बाद हिंसा की घटनाओं से भाजपा को अलग करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि अधिकांश अशांति “तृणमूल बनाम तृणमूल” झड़पों का नतीजा थी, जो राज्य में सत्ता परिवर्तन के कारण भड़की थीं।
भट्टाचार्य ने संवाददाताओं से कहा, “अगर कोई भाजपा का झंडा लेकर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर हमला करता है, तो भाजपा सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं लेगी, क्योंकि हमने अभी तक सत्ता की कमान नहीं संभाली है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि झड़पों में शामिल कई लोग बंगाल में सत्ता परिवर्तन को भांपते हुए “खुद को भाजपा कार्यकर्ता के रूप में पेश करने” की कोशिश कर रहे थे।
भट्टाचार्य ने कहा, “मैं पिछले छह महीनों से कहता आ रहा हूं कि तृणमूल कांग्रेस के सत्ता गंवाने के बाद एक “छोटी अवधि” होगी, जिसमें राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को तृणमूल कांग्रेस को खुद तृणमूल कांग्रेस से बचाना होगा।”
इन टिप्पणियों के जरिये भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह प्रशासनिक पहलू पर संयमित है और हार के बाद तृणमूल कांग्रेस आंतरिक स्तर पर खंडित हो रही है।
भट्टाचार्य ने इस मौके पर संभावित “दल बदलुओं” को यह स्पष्ट संदेश देने की भी कोशिश की कि भाजपा नेतृत्व 2021 के विधानसभा चुनावों की तरह बड़े पैमाने पर राजनीतिक पलायन की पुनरावृत्ति नहीं चाहता है।
उन्होंने कहा, “1980 और 1990 के दशक से ही कई लोगों ने अपने खून-पसीने से इस पार्टी को खड़ा किया है, जब बंगाल में भाजपा की लगभग कोई उपस्थिति नहीं थी। मैं भाजपा का “तृणमूलीकरण” नहीं होने दूंगा।”
प्रदेश भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा कि तृणमूल शासन के दौरान डराने-धमकाने या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों को भाजपा को सुरक्षित पनाहगाह के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने कहा, “कोई भी व्यक्ति स्व-घोषणा के आधार पर भाजपा का सदस्य नहीं बन सकता। तृणमूल कांग्रेस से जुड़े वे लोग, जो अत्याचारों, गैरकानूनी गतिविधियों या धमकी देने में शामिल रहे हैं, वे जवाबदेही से बचने के लिए भाजपा में शरण नहीं ले सकते।”
सरकार ने कहा, “कानून अपना काम करेगा। भाजपा स्वच्छ और पारदर्शी बंगाल के लिए खड़ी है। किसी भी परिस्थिति में किसी भी अपराधी या असामाजिक तत्व को पार्टी का हिस्सा बनने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
भट्टाचार्य ने भाजपा नेताओं को जवाबी हिंसा में शामिल होने या उसके लिए उकसाने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन में संबंधित नेता के कद की परवाह किए बिना उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, “चाहे वह भाजपा का कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो, अगर कोई हिंसा को बढ़ावा देता है, तो हम उसके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। मुझे नाम और सबूत दीजिए, मैं कार्रवाई का वादा करता हूं।”
भट्टाचार्य ने दावा किया कि अगर चुनाव परिणाम इसके विपरीत होते, तो भाजपा के “सैकड़ों” कार्यकर्ता मारे गए होते।
उन्होंने आरोप लगाया, “आज भाजपा की जीत के बावजूद हमारे कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं। अगर नतीजे इसके विपरीत होते, तो सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता मारे जाते।”
भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा हिंसा के खिलाफ है और पार्टी चाहती है कि प्रशासन अराजक तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे।
बंगाल के कुछ हिस्सों में जारी राजनीतिक तनाव के बीच पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सिद्धनाथ गुप्ता ने कहा कि चुनाव के बाद हुई हिंसा के सिलसिले में 200 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और 433 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
राज्य पुलिस मुख्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में गुप्ता ने कहा कि लगभग 1,100 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया है।
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों में और मंगलवार को भी कुछ जगहों पर घटनाएं हुईं। लेकिन बुधवार सुबह से राज्य में कहीं से भी किसी नयी घटना की सूचना नहीं मिली है।”
भाषा पारुल रंजन
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