जकार्ता, आठ अक्टूबर (भाषा) इंडोनेशिया के कई शहरों में नये श्रम कानून के खिलाफ हजारों आक्रोशित विद्यार्थियों और कामगारों का प्रदर्शन बृहस्पतिवार को हिंसक हो गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नये कानून में श्रमिकों के अधिकारों में कटौती की गई है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्रावधान हैं।
जकार्ता के राष्ट्रपति प्रासाद के नजदीक पथराव कर रहे आंदोलनकारियों और दंगा रोधी पुलिस के बीच झड़प उस समय हुई जब पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कामगारों, हाईस्कूल और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को तितर-बितर करने की कोशिश की।
राष्ट्रपति जोको विदोदो इस समय मध्य कलीमनतान प्रांत के दौरे पर हैं और घटना के समय प्रासाद में नहीं थे।
राष्ट्रपति प्रासाद के परिसर में हाई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने प्रवेश करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैसे के गोले दागे और राजप्रासाद तक जाने वाली सड़क धुएं से भरा युद्ध का मैदान बन गई। प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस का मुकाबला किया और पत्थर और बोतलें फेंकी।
आक्रोशित भीड़ ने राष्ट्रपति प्रासाद के नजदीक एक चौराहे पर बने यातायात पुलिस की चौकी में आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायरें जलाई और फाइबरग्लास से बने अवरोधकों में आग लगा दी।
इसी तरह की झड़प योग्यकर्ता, मेदान, मकास्सर, मनादो और पश्चिमी जावा प्रांत की राजधानी बादुंग सहित इंडोनिशिया के सभी बड़ो शहरों में देखने को मिली। बादुंग में दो दिन से जारी हिंसा के आरोप में पुलिस ने 209 लोगों को गिरफ्तार किया है।
गौरतलब है कि सरकार से कानून वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन के आयोजकों ने मंगलवार से तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल बुलाई है।
रोजगार सृजन अधिनियम को सोमवार को संसद ने मंजूरी दी थी और उम्मीद की जा रही है कि इससे इंडोनेशिया के श्रम प्रणाली और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में उल्लेखनीय बदलाव आएंगे।
एपी धीरज शाहिद
शाहिद