जयपुर, 12 अगस्त (भाषा) राजस्थान सरकार ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में एक सरकारी कॉलेज के प्राचार्य को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विभागीय जांच से जुड़े करीब 40 गंभीर मामलों में कार्रवाई को मंजूरी दी है। इनमें अभियोजन की स्वीकृति देने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत कार्रवाई की अनुमति देना शामिल है।
सरकारी महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज में छात्राओं के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री ने प्राचार्य को बर्खास्त करने की मंजूरी दी। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस मामले में प्राचार्य की कथित रूप से मदद करने वाले एक व्याख्याता और एक पुस्तकालयाध्यक्ष को हटाने की भी मंजूरी दी गई है।
मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार और अन्य आपराधिक मामलों में पद और प्रभाव का कथित रूप से दुरुपयोग कर अवैध लाभ हासिल करने के छह गंभीर मामलों में अभियोजन की स्वीकृति भी दी।
अधिकारियों ने बताया कि 2018 में संशोधित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत सवाई मानसिंह अस्पताल के एक वरिष्ठ प्रोफेसर, पशुपालन विभाग के एक संयुक्त निदेशक, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के एक अधीक्षण अभियंता, एक वित्तीय सलाहकार, एक सहायक अभियंता और एक विकास अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई को मंजूरी दी गई है।
सेवानिवृत्त अधिकारियों से जुड़े अन्य मामलों में सरकार ने सेवा के दौरान अनुशासनहीनता, कदाचार और भ्रष्टाचार में कथित संलिप्तता के लिए 10 अधिकारियों की पेंशन रोकने को मंजूरी दी। बयान के अनुसार, इनमें से पांच मामलों में पूरी पेंशन रोकने का निर्णय लिया गया।
सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत पांच मामलों में विस्तृत जांच को भी मंजूरी दी और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को आगे की जांच करने की अनुमति दी।
बयान के अनुसार राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत छह मामलों में विभिन्न अधिकारियों को दंडित किया गया। इनमें उनकी वेतनवृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने की कार्रवाई शामिल है।
भाषा
पृथ्वी रवि कांत