जयपुर, 28 जून (भाषा) राजस्थान ने लगभग 1,500 सरकारी स्कूलों में ‘खुशीशाला’ पहल शुरू करके प्राथमिक शिक्षा में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक मजबूती के लिए एक व्यवस्थित कार्यक्रम शुरू किया है।
राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (आरएससीईआरटी) की ओर से प्रदेश के करीब 1500 सरकारी विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए ‘खुशीशाला’ पहल प्रथम चरण में शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की निदेशक श्वेता फगेड़िया ने बताया कि ‘खुशीशाला’ पहल ने राजस्थान को भारत का पहला ऐसा राज्य बना दिया है, जिसने प्राथमिक शिक्षा में मानसिक स्वास्थ्य और वेलबीइंग (खुशहाली व मानसिक स्वास्थ्य) कार्यक्रम लागू किया है।
उन्होंने बताया, वर्ष 2024 में सिरोही और बांसवाड़ा जिलों में खुशीशाला का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया, इसमें 120 शिक्षकों को शामिल किया गया।
उन्होंने बताया कि इस पायलट कार्यक्रम के उत्साहजनक परिणाम सामने आए। इसमें 53 प्रतिशत विद्यार्थियों में सामाजिक-भावनात्मक कौशलों में सकारात्मक सुधार देखा गया, जबकि बालिकाओं में यह सुधार 69 प्रतिशत तक पहुंचा।
उन्होंने बताया कि इन गतिविधियों का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि बच्चों का मानसिक स्तर मजबूत हुआ है। साथ ही बच्चों में पढ़ाई का तनाव कम हुआ और बच्चे खेल-खेल में पढ़ाई का आनंद लेने लगे।
निदेशक ने बताया कि पायलट कार्यक्रम की सफलता के बाद वर्ष 2025 में तकनीकी सहयोगी संस्था क्षमतालय फाउंडेशन के साथ मिलकर 165 शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसमें तीन दिन का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण और 60 घंटे का ऑनलाइन शिक्षण शामिल था। इसके अलावा राजस्थान की 33 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान(डाइट्स) में 40-40 शिक्षकों सहित कुल 1320 शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया गया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में ‘खुशीशाला’ पहल का विस्तार करते हुए पंचायत स्तर पर कुल 11,305 शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
साथ ही जिला स्तरीय प्रशिक्षणों के माध्यम से राज्य के 649 पीएम श्री विद्यालयों तक भी यह पहल पहुंचाई जाएगी। उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर तथा पीएम श्री विद्यालय स्तर पर शिक्षकों के प्रशिक्षण के उपरांत राज्य के 12,000 से अधिक विद्यालयों में कम से कम एक प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध होगा, जो प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों तक खुशीशाला की अवधारणा और गतिविधियों को प्रभावी रूप से पहुंचाएगा।
आरएससीईआरटी के अनुसार, ‘खुशीशाला’ पहल का उद्देश्य बच्चों में भावनात्मक सशक्तता, सामाजिक विकास और जीवन कौशल का विकास करना है। इसमें विद्यार्थियों के साथ—साथ शिक्षकों के भी मानसिक स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण और व्यावहारिक प्रशिक्षण को भी शामिल किया गया है।
पहल के तहत बच्चों के लिए गतिविधि आधारित शिक्षण होगा, वहीं शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण देकर विद्यार्थियों की मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को समझने के लिए तैयार किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि इसके तहत शिक्षकों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षक अपने मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य पर कार्य करते हैं। साथ ही 21 दिनों का एक आडियो कार्यक्रम भी दिया गया है।
उन्होंने बताया कि शिक्षक प्रतिदिन लगभग 15 मिनट की एक ऑडियो सुनते हैं। इन ऑडियो में कहानियां होती हैं तथा कुछ प्रश्न होते हैं, जो इस बात से संबंधित होते हैं कि व्यक्ति अपनी भावनाओं को कैसे समझ सकता है, भावनाओं की पहचान कैसे कर सकता है, शरीर में तनाव के संकेतों को कैसे पहचान सकता है तथा अपने रिश्तों को कैसे बेहतर बना सकता है। इन सभी विषयों को अलग-अलग थीम्स के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का मुख्य फोकस केवल इस बात पर नहीं है कि शिक्षक प्रशिक्षण ग्रहण करें, बल्कि इस पर भी है कि वे इसे बच्चों तक प्रभावी ढंग से कैसे पहुंचाएं।
प्रशिक्षण की सामग्री को बच्चों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए आरएससीईआरटी ने कक्षा 1 से 5 तक की शिक्षक संदर्शिकाएं तैयार की हैं। इन पुस्तिकाओं के मोबाइल संस्करण भी तैयार किए गए हैं, ताकि प्रशिक्षित शिक्षकों को लगातार सहयोग मिल सके। इन संदर्शिकाओं में आयु-उपयुक्त छात्र गतिविधियां शामिल हैं। शिक्षक इन संदर्शिकाओं का अध्ययन करके बच्चों के साथ विभिन्न गतिविधियां करवाएंगे।
आरएससीईआरटी अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चे खुद को सुरक्षित, आत्मविश्वासी और खुलकर अभिव्यक्त करने योग्य महसूस करें।
कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों के लिए एक विशेष दीक्षा ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी जल्द शुरू किया जाएगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राजस्थान में समग्र शिक्षा और मानसिक कल्याण को नई दिशा देने का काम करेगी।
भाषा बाकोलिया खारी नरेश
नरेश