रक्षा मंत्री ने आईसीजी के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को बेड़े में शामिल किया

रक्षा मंत्री ने आईसीजी के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को बेड़े में शामिल किया

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  • Publish Date - January 5, 2026 / 01:36 PM IST,
    Updated On - January 5, 2026 / 01:36 PM IST

पणजी, पांच जनवरी (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को गोवा में भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के पहले स्वदेशी रूप से डिजाइन व निर्मित प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को बल में शामिल किया।

अधिकारियों ने बताया कि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) द्वारा निर्मित 114.5 मीटर लंबे इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। 4,200 टन वजन वाला यह पोत 22 समुद्री मील से अधिक गति से चल सकता है और 6,000 समुद्री मील का सफर तय कर सकता है।

उन्होंने कहा कि यह पोत समुद्री प्रदूषण नियंत्रण नियमों को लागू करने, समुद्री कानून प्रवर्तन, खोज व बचाव कार्यों तथा भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

बल ने एक बयान में कहा कि भारत में निर्मित सबसे बड़ा और सबसे उन्नत प्रदूषण नियंत्रण जहाज समुद्र प्रताप देश की पोत निर्माण की उत्कृष्टता और स्वच्छ, सुरक्षित व आत्मनिर्भर समुद्री भविष्य के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण का प्रतीक है।

बयान में कहा गया है कि यह जहाज दिसंबर में गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) में औपचारिक रूप से तटरक्षक बल को सौंपा गया था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को गोवा के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित जीएसएल में इस जहाज को बल के बेड़े में शामिल किया।

मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, केंद्रीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और आईसीजी के महानिदेशक परमेश शिवमणी इस अवसर पर उपस्थित थे।

सिंह ने कहा कि यह अवसर भारत के महान समुद्री दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘भारत मानता है कि समुद्री संसाधन किसी एक देश की संपत्ति नहीं हैं; वे मानवता की साझी धरोहर हैं।’

सिंह ने कहा, ‘जब धरोहर साझा होती है, तो उसकी जिम्मेदारी भी साझा होती है। यही कारण है कि आज भारत एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति बन गया है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्र प्रताप भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण पोत है।

उन्होंने कहा, ‘यह अब तक तटरक्षक बल का सबसे बड़ा जहाज है।’

सिंह ने कहा कि इसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। ‘मेक इन इंडिया’ का असली मतलब ऐसी परियोजनाओं में दिखाई दे रहा है।’

सिंह ने कहा कि “इतने जटिल प्लेटफॉर्म के बावजूद हमने स्वदेशी सामग्री का यह स्तर हासिल किया है, जो दर्शाता है कि हमारा रक्षा औद्योगिक परिवेशी तंत्र अब काफी परिपक्व हो चुका है।”

उन्होंने कहा, “लेकिन इसे और अधिक परिपक्व होने की आवश्यकता है। मैं केवल 60 प्रतिशत नहीं, बल्कि अपने जहाजों में 90 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री चाहता हूं। यही हमारा प्रयास है।”

सिंह ने कहा कि रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भारत ने ऐसी क्षमताएं हासिल कर ली हैं कि आज वह विनिर्माण से जुड़ी जटिल चुनौतियों से भी निपटने में सक्षम है।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में समुद्री प्रदूषण एक गंभीर चुनौती के रूप में उभरता हुआ देखा गया है। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट है कि जैसे-जैसे समुद्री प्रदूषण बढ़ेगा, इसका असर मछुआरों की आजीविका, तटीय समुदायों के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा पर पड़ेगा।”

सिंह ने यह भी कहा कि महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करना उनकी सरकार का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए तटरक्षक बल ने महिला सशक्तीकरण पर उचित ध्यान दिया है। यह हमारे लिए गर्व की बात है।”

उन्होंने बताया कि महिला अधिकारियों को पायलट, ऑब्जर्वर, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और लॉजिस्टिक्स अधिकारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

सिंह ने कहा, “इतना ही नहीं, उन्हें होवरक्राफ्ट परिचालन के लिए भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्हें सक्रिय रूप से अग्रिम मोर्चों पर तैनात किया जा रहा है। आज महिलाएं केवल सहायक भूमिकाओं में नहीं हैं, बल्कि अग्रिम पंक्ति की योद्धा के रूप में भी सेवाएं दे रही हैं।”

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ को बल की सेवा में शामिल करना, जहाज निर्माण और समुद्री क्षमताओं के विकास में भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ का अर्थ ‘समुद्र की महिमा’ है, और यह पोत सुरक्षित, संरक्षित और स्वच्छ समुद्र सुनिश्चित करने तथा देश के समुद्री हितों की रक्षा के प्रति तटरक्षक बल के संकल्प को दर्शाता है। यह पोत स्वदेशी जहाज डिजाइन और निर्माण में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है।

आईसीजी के अनुसार, यह पोत पूरी तरह से भारत में परिकल्पित, डिजाइन और निर्मित किया गया है, जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसमें उन्नत स्वचालन तथा कंप्यूटरीकृत नियंत्रण प्रणालियां लगी हैं, जो जटिल जहाज निर्माण में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती हैं।

लगभग 4,200 टन विस्थापन क्षमता वाला यह पोत दो 7,500 किलोवाट डीजल इंजनों से संचालित है, जो स्वदेशी रूप से विकसित नियंत्रणयोग्य पिच प्रोपेलर और गियरबॉक्स को चलाते हैं। इससे इसे बेहतर संचालन क्षमता, लचीलापन और 6,000 समुद्री मील तक की परिचालन क्षमता मिलती है।

आईसीजी ने बताया कि इस पोत की मुख्य भूमिका समुद्र में प्रदूषण प्रतिक्रिया की है। इसके लिए इसमें साइड-स्वीपिंग आर्म्स, फ्लोटिंग बूम्स, उच्च क्षमता वाले स्किमर्स, पोर्टेबल बार्ज और प्रदूषण नियंत्रण प्रयोगशाला जैसी अत्याधुनिक प्रणालियां लगी हैं।

इसके अलावा, जहाज में बाह्य अग्निशमन प्रणाली (फाई-फाई क्लास-1) भी स्थापित है।

आईसीजी के मुताबिक, यह जहाज अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जिसमें 30 मिलीमीटर सीआरएन-91 गन, दो 12.7 मिलीमीटर स्थिरीकृत रिमोट-नियंत्रित गन (एकीकृत अग्निशमन प्रणाली के साथ), स्वदेशी एकीकृत ब्रिज सिस्टम, एकीकृत मंच प्रबंधन प्रणाली, स्वचालित ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली और उच्च क्षमता वाला बाहरी अग्निशमन तंत्र शामिल है।

उप महानिरीक्षक अशोक कुमार भामा के नेतृत्व में यह जहाज कोच्चि में तैनात किया जाएगा। आईसीजी के अनुसार, इसमें 14 अधिकारी और 115 कर्मियों का दल होगा, जिसमें पहली बार दो महिला अधिकारियों की नियुक्ति भी शामिल है, जो अपने पुरुष सहकर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दायित्वों का निर्वहन करेंगी।

आईसीजी ने पूर्व में कहा था कि यह पोत तेल रिसाव का पता लगाने के लिए उन्नत प्रणालियों से सुसज्जित है, जैसे कि ‘ऑयल फिंगरप्रिंटिंग मशीन’, ‘जाइरो स्टेबलाइज्ड स्टैंडऑफ एक्टिव केमिकल डिटेक्टर’ और पीसी लैब उपकरण।

अधिकारियों ने कहा कि इस पोत के सेवा में शामिल होने से भारत की समुद्री प्रदूषण से निपटने की क्षमता मजबूत होगी और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को बल मिलेगा।

भाषा जोहेब मनीषा

मनीषा