नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने मंगलवार को कहा कि हिमालयी क्षेत्र में हाल की घटनाओं और 2023 में सिक्किम में आई आपदा से जलवायु परिवर्तन के कारण बदलते जोखिमों का पता चलता है जो कि जल निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, समय पर पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने और ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर तैयारी की जरूरत को दर्शाता है।
पाटिल ने यहां स्थित भारत मंडपम में नौवें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह (आईआईडब्ल्यूडब्ल्यू) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि इस वर्ष के आयोजन की विषयवस्तु ‘जलवायु अनुकूल जल प्रबंधन’ पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है क्योंकि जलवायु परिवर्तन तेजी से जल चक्र को बदल रहा है।
पाटिल ने कहा, ‘‘कुछ स्थानों पर बहुत अधिक बारिश हो रही है जबकि कुछ जगहों पर बहुत कम और कई बार जब बारिश की सबसे अधिक जरूरत होती है तब नहीं होती। हिमालयी क्षेत्र में हाल की घटनाएं और 2023 में सिक्किम में आई आपदा हमें याद दिलाती हैं कि जलवायु के बदलने के साथ इससे पैदा होने वाले जोखिम भी बदल रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें बेहतर विज्ञान, मजबूत निगरानी, समय पर पूर्व चेतावनी और बेहतर तैयारी की जरूरत है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।’’
उनकी यह टिप्पणी अगस्त में नेपाल-चीन सीमा पर ग्लेशियर से जुड़ी अचानक आई बाढ़ के कारण हिमालयी क्षेत्र में विनाशकारी हादसे के कुछ सप्ताह बाद आई है।
नेपाल में पिछले महीने आई बाढ़ में जान गवांने वालों की संख्या रविवार को 1,450 के पार हो गई जबकि देश अभी भी इस आपदा के बाद के दुष्प्रभावों से जूझ रहा है।
दक्षिण ल्होनक झील में बड़े पैमाने पर भूस्खलन के कारण हिमनद झील फटने (जीएलओएफ) से चार अक्टूबर 2023 को सिक्किम में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी।
भाषा प्रचेता प्रशांत
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