न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के विरूद्ध टिप्पणीः प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के अनुरोध वाली याचिका पर नोटिस जारी

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न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के विरूद्ध टिप्पणीः प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के अनुरोध वाली याचिका पर नोटिस जारी

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  • Publish Date - January 28, 2026 / 04:49 PM IST,
    Updated On - January 28, 2026 / 04:49 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को तमिलनाडु सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन के खिलाफ जाति और धर्म आधारित अपमानजनक टिप्पणी करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।

मदुरै के तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी पर ‘कार्तिकई दीपम’ प्रज्ज्वलित करने की अनुमति देने पर न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के विरूद्ध ऐसी टिप्पणियां की गयी।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक, चेन्नई के पुलिस आयुक्त और अन्य को नोटिस जारी किए।

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को इस मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई की तारीख दो फरवरी तय की।

उच्चतम न्यायालय अधिवक्ता जी एस मणि की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वामपंथी पार्टियों समेत सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) समर्थित दलों ने कुछ व्यक्तियों और वकीलों के साथ मिलकर न केवल सार्वजनिक स्थानों पर बल्कि चेन्नई और मदुरै में मद्रास उच्च न्यायालय के परिसर के भीतर भी अवैध विरोध प्रदर्शन किया और न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के खिलाफ बेहद अपमानजनक टिप्पणियां कीं।

इसमें आरोप लगाया गया है कि ‘‘जाति और धर्म आधारित मानहानिकारक टिप्पणियां’’ सामाजिक सद्भाव एवं कानून व्यवस्था को बिगाड़ने और सांप्रदायिक अशांति को भड़काने के इरादे से की गई थीं।

याचिका में तमिलनाडु सरकार और पुलिस अधिकारियों को ऐसे कृत्यों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही सहित सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने एक दिसंबर, 2025 को उन रिट याचिकाओं को स्वीकार कर लिया, जिनमें एक दरगाह के निकट तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी पर स्थित पत्थर के दीप स्तंभ ‘दीपथून’ पर कार्तिकई दीपम को प्रज्ज्वलित करने के लिए उचित व्यवस्था करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

जब आदेश का पालन नहीं हुआ, तो न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने तीन दिसंबर को एक और आदेश पारित किया, जिसमें श्रद्धालुओं को स्वयं दीपक जलाने की अनुमति दी गई और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत का रुख किया।

भाषा राजकुमार पवनेश

पवनेश