नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश के जानबूझकर उल्लंघन पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राष्ट्रीय राजधानी में अधिसूचित 173 विरासत स्थलों की संरक्षण स्थिति पर जवाब प्रस्तुत करने में विफल रहने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक को अवमानना नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एएसआई के महानिदेशक को अगली सुनवाई की तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा, ‘‘अदालत इस आदेश के जानबूझकर उल्लंघन पर कड़ी आपत्ति जताती है। इसलिए, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक को नोटिस जारी किया जाता है कि वह कारण बताएं कि अदालत उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू करे। उन्हें अगली सुनवाई की तारीख पर कारण बताओ नोटिस के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग ने 19 स्मारकों की पहचान कर उनका निरीक्षण किया है और सिवाय ‘लोकेशन’ और ‘जियो-मैपिंग’ के अधिकांश बिंदुओं/क्षेत्रों के संबंध में अनुपालन किया गया है।
पीठ ने कहा, ’‘‘हालांकि, पूर्व के आदेशों में उल्लिखित मुद्दों पर अनुपालन के संबंध में केवल एक सामान्य बयान दिया गया है। हम निर्देश देते हैं कि एक और हलफनामा दाखिल किया जाए जिसमें उन 19 स्थलों का विवरण दिया जाए जो पुरातत्व विभाग, दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और जिनका निरीक्षण भी किया जा चुका है।’’
न्यायालय ने कहा, ‘‘इसमें हमारे पिछले आदेशों में उल्लिखित सभी क्षेत्रों का और साथ ही स्मारक के संबंध में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख होना चाहिए। इसमें संबंधित स्थलों की अद्यतन तस्वीरें भी शामिल होनी चाहिए।’’
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने चिह्नित 85 स्मारकों में से केवल 62 स्मारकों का सर्वेक्षण किया और कुछ पहलुओं पर यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
विरासत स्थलों का मुद्दा राजीव सूरी द्वारा दायर एक मामले में उठा, जिसमें उन्होंने दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी में स्थित लोदी काल के स्मारक शेख अली की गुमटी पर अतिक्रमण का मुद्दा उठाया था।
भाषा आशीष माधव
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