नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को चेन्नई में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में कार्यवाही रद्द कर दी और कहा कि आरोप पक्षकारों के बीच पूरी तरह से दीवानी विवाद की ओर इशारा करते हैं।
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां की पीठ ने कहा कि मामले में शिकायतकर्ता ने पूरी तरह से दीवानी विवाद को ‘फौजदारी रंग’ देने की कोशिश की है, और आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का सरासर दुरुपयोग होगा।
उच्चतम न्यायालय ने दो अपीलकर्ताओं की अपील पर अपना फैसला सुनाया, जिन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय के मार्च 2025 के आदेश को चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय ने अपील करने वालों के खिलाफ अधीनस्थ अदालत में लंबित कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने कहा कि अपील करने वालों पर आरोप है कि उन्होंने पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात के लिए सजा) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत दंडनीय अपराध किए हैं।
उच्चतम न्यायालय के पिछले एक फैसले का जिक्र करते हुए, पीठ ने कहा कि यह माना गया था कि एक ही तरह के आरोपों पर धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के अपराध नहीं चल सकते।
पीठ ने कहा, ‘‘दोनों प्रावधान और इस अदालत के ऊपर दिए गए फैसले को ध्यान से देखने पर, हम पाते हैं कि एक ही संपत्ति और एक ही तरह के तथ्यों के आधार पर, आरोपी के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी के अपराध नहीं चल सकते।’’
उसने कहा कि पक्षों के बीच का झगड़ा असल में दीवानी प्रकृति का था।
भाषा वैभव दिलीप
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