न्यायालय ने सिख धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा, ऑडिट के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया

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न्यायालय ने सिख धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा, ऑडिट के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया

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  • Publish Date - May 20, 2026 / 02:15 PM IST,
    Updated On - May 20, 2026 / 02:15 PM IST

नयी दिल्ली, 20 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को देशभर में सिख धार्मिक और विरासत संपत्तियों की सुरक्षा, ऑडिट और विनियमन के लिए कई निर्देश जारी करने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता चरणजीत सिंह से कहा कि वह अपनी शिकायतें संसद की याचिका समिति के समक्ष उठाएं।

दिल्ली के एक सिख संगठन से जुड़े सिंह स्वयं अदालत में पेश हुए और अपना पक्ष रखा। एक समय उन्होंने पीठ के सामने झुककर नोटिस जारी करने की अपील की।

सिंह ने कहा, ‘‘मैं आपके सामने नतमस्तक हूं। कृपया मेरी याचिका पर नोटिस जारी करें।’’

इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अदालत के दरवाजे हमेशा खुले हैं, लेकिन मांगी गई राहत विधायी क्षेत्र के अंतर्गत आती है।

सीजेआई ने कहा, ‘‘अदालत आपके लिए है, आप जब चाहें आ सकते हैं। लेकिन इन मुद्दों के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता है, जिसके लिए आपको संसद जाना होगा। आपको संसद की याचिका समिति से संपर्क करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम इसमें हस्तक्षेप करते हैं, तो ऐसा प्रतीत हो सकता है कि धार्मिक मामलों में दखल दिया जा रहा है।’’ हालांकि पीठ ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि यदि वह संसद से मिलने वाले जवाब से संतुष्ट नहीं हों, तो दोबारा उच्चतम न्यायालय आ सकते हैं।

इस जनहित याचिका में देशभर में सिख धार्मिक और विरासत संपत्तियों के प्रबंधन की व्यवस्था में व्यापक बदलाव का अनुरोध किया गया था।

याचिका में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को उन मामलों की जांच का निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया है, जिनमें ‘‘सिख विरासत संपत्तियों के बड़े पैमाने पर अवैध हस्तांतरण, कम मूल्यांकन, गबन या उससे प्राप्त धन के शोधन’’ के आरोप हों।

भाषा गोला वैभव

वैभव

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