Schools will be closed across the state
Schools will be closed across the state: नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। यहां मंगलवार से धुंध और धुएं की परत जमी हुई है। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेज रहे माता-पिता भी उनकी सेहत को लेकर सोच में पढ़ गए हैं। सवाल उठ रहे हैं कि अगर प्रदूषण ऐसे ही बना रहा तो क्या स्कूल भी बंद हो सकते हैं? पिछले साल भी वायु प्रदूषण गंभीर स्थिति में पहुंचने के बाद स्कूलों को बंद करने की नौबत आ गई थी।
बीते साल भी नवंबर के आखिर में प्रदूषण काफी बढ़ गया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा था कि खतरनाक प्रदूषण के बीच बच्चों को स्कूल जाने के लिए मजबूर क्यों किया जा रहा है? इसके बाद 2 दिसंबर 2021 को दिल्ली के सभी स्कूलों को बंद करने आदेश जारी किया गया था। उस दिन दिल्ली में AQI 350 के करीब, नोएडा में 500 से ज्यादा था।
एक्सपर्ट की मानें तो पंजाब में पराली जलाए जाने और हवाओं की धीमी रफ्तार से चलने के कारण मंगलवार को दिल्ली की हवा 10 महीने में सबसे ज्यादा खराब स्थिति में पहुंच गई। मंगलवार शाम चार बजे समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 424 पहुंच गया था, जो 26 दिसंबर 2021 (459) के बाद सबसे खराब है।
दिल्ली में प्रदूषण के खतरनाक स्तर के कारण स्कूली बच्चों की सुरक्षा चिंता का विषय है, अभी तक दिल्ली की राज्य सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है। बच्चे स्कूल आने जाने में, खेल के मैदानों में ज़हरीली हवा के चपेट में हैं। ये लापरवाही ग़लत है, इस पर NCPCR नोटिस जारी कर रहा है।
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हालाकि अधिकारियों का कहना है कि शुक्रवार तक वायु गुणवत्ता सुधर सकती है और ऐसे में अभी चौथे चरण की पाबंदियां लागू नहीं की जा रही हैं। निर्माण कार्य पहले से ही बंद हैं। चौथे चरण में शहर में ट्रकों की एंट्री पर बैन लगने के साथ ही सभी डीजल गाड़ियों पर बैन लग जाती है। फिलहाल दिल्ली में ग्रैप का तीसरा चरण लागू है।
जरूरी सामान लेकर आने वाले ट्रक ही राजधानी में आ सकेंगे(सीएनजी और इलेक्ट्रिक ट्रकों को छूट)
डीजल से चलने वाले मध्यम और बड़े ट्रक नहीं चल सकेंगे (जरूरी सामानों की सप्लाई से जुड़े ट्रकों को छूट)
डीजल से चलने वाली कारों पर दिल्ली और इससे जुड़े शहरों में रोक (बीएस-6 और जरूरी सेवाओं से जुड़ी गाड़ियों को छूट)
एनसीआर में पीएनजी के अलावा अन्य ईंधन का इस्तेमाल करने वाली सभी इंडस्ट्री बंद, फिर चाहे वहां पीएनजी सप्लाई है या नहीं है
निर्माण और तोड़ के पब्लिक प्रोजेक्ट भी बंद। इसमें हाइवे, सड़के, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, पावर ट्रांसमिशन, पाइपलाइन आदि से जुड़े काम भी शामिल हैं
दिल्ली-एनसीआर की राज्य सरकारें फैसला कर सकती हैं कि अपने ऑफिस और प्राइवेट ऑफिस में 50 प्रतिशत कर्मियों को वर्क फ्रॉम होम दें
केंद्र सरकार भी फैसला कर सकता है कि वह अपने ऑफिस में वर्क फ्रॉम होम लागू करे
राज्य सरकारें स्कूल, कॉलेज, संस्थान, गाड़ियों पर ऑड ईवन आदि से जुड़े फैसले ले सकती हैं।