भुवनेश्वर, नौ जुलाई (भाषा) उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि विज्ञान को न केवल ज्ञान पैदा करना चाहिए, बल्कि नीति-निर्माण में मार्गदर्शन भी करना चाहिए और निरंतरता सुनिश्चित करनी चाहिए, क्योंकि आज की दुनिया अभूतपूर्व अवसरों एवं जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है।
भुवनेश्वर स्थित राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईएसईआर) के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया के सामने अभूतपूर्व अवसर और जटिल चुनौतियां हैं, जिनमें जलवायु परिवर्तन, नयी बीमारियां और कृत्रिम मेधा (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग और उन्नत सामग्री के क्षेत्र में तेज़ी से हो रही प्रगति शामिल है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में, विज्ञान को न केवल ज्ञान पैदा करना चाहिए बल्कि नीति का मार्गदर्शन भी करना चाहिए और निरंतरता सुनिश्चित करनी चाहिए।’’
राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘भारत जैसे देश के लिए, जिसके पास जनसांख्यिकीय शक्ति और विकास की बड़ी आकांक्षाएं हैं, वैज्ञानिक क्षमता कोई विकल्प नहीं बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को हासिल करने की बुनियाद है।’’
उन्होंने स्नातक होने वाले छात्रों से आग्रह किया कि वे जिज्ञासा की भावना को बनाए रखें, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा का पालन करें, चुनौतियों को स्वीकार करें तथा अपने ज्ञान का उपयोग समाज की भलाई के लिए करें।
भाषा नेत्रपाल अविनाश
अविनाश