शिवकुमार ने कावेरी जल विवाद से निपटने के सरकार के तरीके का बचाव किया

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शिवकुमार ने कावेरी जल विवाद से निपटने के सरकार के तरीके का बचाव किया

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  • Publish Date - July 31, 2026 / 07:30 PM IST,
    Updated On - July 31, 2026 / 07:30 PM IST

बेंगलुरु, 31 जुलाई (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कावेरी जल विवाद से निपटने के उनकी सरकार के तरीके का शुक्रवार को बचाव किया और कहा कि राज्य ने सभी कानूनी एवं राजनीतिक विकल्पों का इस्तेमाल कर लिया है। उन्होंने विरोध-प्रदर्शनों के बीच संयम बरतने की अपील भी की।

शिवकुमार का यह बयान कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) द्वारा तमिलनाडु को 15 दिन के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के निर्देश को बरकरार रखे जाने के बाद आया है।

शिवकुमार ने याद दिलाया कि आगे की कार्रवाई तय करने के लिए रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है।

उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को खारिज कर दिया कि कर्नाटक के अधिकारी सीडब्ल्यूएमए के सामने राज्य का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में नाकाम रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने तुरंत इस आदेश को चुनौती दी और साथ ही राज्य के केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों समेत सभी दलों से समर्थन जुटाया।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, “भले ही प्राधिकरण को लगे कि हमारे पास पर्याप्त पानी आ रहा है, फिर भी कर्नाटक के हितों की रक्षा करना मेरा और मेरी सरकार का कर्तव्य है।”

शिवकुमार ने कहा कि कावेरी नीरावरी निगम लिमिटेड के कर्नाटक के मुख्य अभियंता, जो सीडब्ल्यूआरसी के सदस्य भी हैं, ने सलाहकारों, प्रधान सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव और महाधिवक्ता के साथ मिलकर कार्यवाही में हिस्सा लिया और राज्य का पक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली पिछली भाजपा सरकार में सलाहकार रहे व्यक्ति ने भी सुनवाई में हिस्सा लिया।

शिवकुमार ने बताया कि कर्नाटक ने पानी की मात्रा में कटौती करने और ज्यादा समय देने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने तर्क दिया कि राज्य में पानी की आवक पर्याप्त थी, जिसके बाद सीडब्ल्यूएमए ने पानी छोड़ने के निर्देश को बरकरार रखा।

शिवकुमार ने कहा कि जलाशय के जल-स्तर और पानी के आवक (इनफ्लो) का आंकड़ा पारदर्शी है और केंद्र, तमिलनाडु तथा मीडिया के लिए उपलब्ध है; इसमें हारंगी में 95 प्रतिशत, काबिनी में 83 प्रतिशत, हेमावती में 67 प्रतिशत और केआरएस में 36 प्रतिशत जल-भंडारण है।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में पानी का बहाव लगभग 25,000 क्यूसेक था, जिसमें से उसे 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था।

शिवकुमार ने कहा कि सरकार ने तुरंत इस आदेश को चुनौती दी और अपील दायर करने से पहले ही दिल्ली में कर्नाटक के सांसदों की एक बैठक बुलाई, जिसमें तीन केंद्रीय मंत्रियों, उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर और राज्य के छह मंत्रियों समेत 36 सांसदों ने हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा, “जब कर्नाटक के पानी के मुद्दों और हमारी जमीन के हितों की बात आती है, तो कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। हम सभी को मिलकर काम करना चाहिए।”

शिवकुमार ने कहा कि तमिलनाडु ने संकट-साझाकरण फॉर्मूले के तहत लगभग 99.4 टीएमसी पानी की मांग की थी, लेकिन प्राधिकरण ने उससे आधी मात्रा ही मंजूर की।

उन्होंने बताया कि कानूनी और राजनीतिक प्रतिक्रिया पर विचार-विमर्श करने के लिए रविवार को पूर्व मुख्यमंत्रियों, सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और विधायकों की सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है।

शांति बनाए रखने की अपील करते हुए शिवकुमार ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्होंने संगठनों से बंद और आंदोलन न करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा, “ऐसी हरकतें जरूरी नहीं हैं। हम पहले से ही आपके साथ खड़े हैं। बंद से इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकलेगा।”

भाषा प्रशांत पारुल

पारुल