राज्य पुलिस केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर सकती है : न्यायालय

राज्य पुलिस केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर सकती है : न्यायालय

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  • Publish Date - January 20, 2026 / 05:36 PM IST,
    Updated On - January 20, 2026 / 05:36 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने अपने एक फैसले में कहा कि रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के अपराधों के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत राज्य पुलिस के अधिकारी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर सकते हैं और आरोप पत्र दाखिल कर सकते हैं।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि राज्य पुलिस द्वारा केंद्र सरकार के किसी कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज करने से पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सोमवार को कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों की जांच राज्य एजेंसी या केंद्रीय एजेंसी या किसी भी पुलिस एजेंसी द्वारा की जा सकती है, इस शर्त के साथ कि पुलिस अधिकारी एक विशेष रैंक का होना चाहिए। पीठ ने कहा कि इसका उल्लेख अधिनियम की धारा 17 में देखा जा सकता है।

धारा 17 राज्य पुलिस या राज्य की किसी विशेष एजेंसी को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और कदाचार से संबंधित मामलों को दर्ज या जांच करने से नहीं रोकती है।

पीठ ने कहा, ‘‘सुविधा और काम के दोहराव से बचने के लिए, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को केंद्र सरकार और उसके उपक्रमों के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों की जांच का जिम्मा सौंपा गया है, और भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो – राज्य की एक विशेष जांच एजेंसी – को राज्य सरकार और उसके उपक्रमों के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों की जांच का जिम्मा सौंपा गया है।’’

न्यायालय ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध संज्ञेय होते हैं और इसलिए राज्य पुलिस द्वारा इनकी जांच की जा सकती है।

उच्चतम न्यायालय का यह आदेश राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखते हुए आया है, जिसमें केंद्र सरकार के एक कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि भले ही आरोपी केंद्रीय सरकारी कर्मचारी था, फिर भी राजस्थान एसीबी (भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो) को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने का अधिकार था।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए सही दृष्टिकोण अपनाया कि यह कहना गलत है कि केवल सीबीआई ही अभियोजन शुरू कर सकती है।’’

भाषा सुभाष नरेश

नरेश