न्यायालय ने आंध्र प्रदेश के शराब घोटाले में तीन आरोपियों के अंतरिम संरक्षण की अवधि बढ़ाई

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न्यायालय ने आंध्र प्रदेश के शराब घोटाले में तीन आरोपियों के अंतरिम संरक्षण की अवधि बढ़ाई

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  • Publish Date - January 21, 2026 / 01:40 PM IST,
    Updated On - January 21, 2026 / 01:40 PM IST

नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 3500 करोड़ रुपये के कथित आंध्र प्रदेश शराब घोटाला मामले में उन तीन आरोपियों को दिए गए अंतरिम संरक्षण की अवधि बुधवार को बढ़ा दी जिन्हें उच्च न्यायालय ने आत्मसमर्पण करने को कहा था।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से हालांकि इनकार कर दिया जिसमें आरोपियों को दी गई जमानत रद्द कर दी गई थी।

शीर्ष अदालत ने आरोपियों से नियमित जमानत के लिए अधीनस्थ अदालत जाने को कहा।

उच्च न्यायालय ने पिछले साल 19 नवंबर को उनकी जमानत रद्द कर दी थी और उन्हें 26 नवंबर को अधीनस्थ अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर नियमित जमानत के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया था।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले बालाजी गोविंदप्पा, पेल्लाकुरु कृष्ण मोहन रेड्डी और के. धनुंजय रेड्डी की याचिकाओं पर आंध्र प्रदेश एवं अन्य को नोटिस जारी किए थे और आगे आदेश आने तक उन्हें आत्मसमर्पण से संरक्षण दिया था।

धनुंजय रेड्डी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में सचिव रहे हैं। कृष्ण मोहन रेड्डी तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) थे और बालाजी गोविंदप्पा ‘भारती सीमेंट्स’ के निदेशक थे।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी ए सुंदरम, सिद्धार्थ दवे और मुकुल रोहतगी पेश हुए। आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने पक्ष रखा।

भाषा

सिम्मी वैभव

वैभव