Supreme Court Verdict On Menstrual Leave/ Image Source : IBC24 /FILE
नई दिल्ली : Supreme Court Verdict On Menstrual Leave सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए ‘मेनस्ट्रुअल लीव’ को अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने स्पष्ट किया है कि इसे कानून के जरिए अनिवार्य करने से महिलाओं की रोजगार क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि यह मामला नीतिगत है, जिस पर संबंधित प्राधिकरणों को विचार करना चाहिए।
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से पेश वकील एम. आर. शमशाद ने तर्क दिया कि केरल के स्कूलों सहित देश के कुछ संस्थानों ने पहले ही इस दिशा में राहत प्रदान की है। Menstrual Leave Policy कई निजी कंपनियां भी स्वैच्छिक आधार पर यह सुविधा दे रही हैं। हालांकि, पीठ ने कहा कि जहां स्वैच्छिक तौर पर मिलने वाली ऐसी छुट्टियां स्वागत योग्य हैं, वहीं इसे कानूनन अनिवार्य बनाना महिलाओं के करियर के लिए हानिकारक हो सकता है।
अदालत ने चिंता व्यक्त की कि इस तरह का अनिवार्य प्रावधान न केवल ‘जेंडर स्टीरियोटाइप्स’ को मजबूत करेगा, बल्कि इसके डर से नियोक्ता महिलाओं को नौकरी पर रखने से कतराने लगेंगे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अनिवार्य कानून का विपरीत प्रभाव पड़ सकता है, जिससे महिलाओं को नौकरी मिलने में अधिक मुश्किलें आ सकती हैं।
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