निर्माण श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा से जुड़ी जनहित याचिका पर न्यायालय ने मांगा केंद्र से जवाब

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निर्माण श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा से जुड़ी जनहित याचिका पर न्यायालय ने मांगा केंद्र से जवाब

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  • Publish Date - September 21, 2026 / 04:59 PM IST,
    Updated On - September 21, 2026 / 04:59 PM IST

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 2020 के कानून के तहत निर्माण और अन्य कार्यों में लगे श्रमिकों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा व स्वास्थ्य मानक तय करने की याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता ‘नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर सेंट्रल लेजिस्लेशन ऑन कंस्ट्रक्शन लेबर’ (एनसीसीसीएलसीएल) की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण की दलीलों पर गौर किया और हरियाणा सरकार तथा अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया।

याचिका में नौ मार्च, 2026 को गुरुग्राम के सिधरावली क्षेत्र में एक निर्माण स्थल पर हुए हादसे की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने तथा मृतक व घायल श्रमिकों को मुआवजा तथा पुनर्वास लाभ देने की भी मांग की गई है।

संक्षिप्त सुनवाई के दौरान भूषण ने कहा कि याचिका में निर्माण श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया है।

उन्होंने कहा कि व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कामकाजी परिस्थितियां संहिता (ओएसएच), 2020 से मुद्दे का उचित समाधान नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि आमतौर पर निर्माण स्थल पर किसी भी हादसे के बाद प्राथमिकी दर्ज कर ली जाती है, लेकिन श्रमिकों को कितना मुआवजा दिया जाना है, यह तय करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने कहा कि जनहित याचिका में ऐसे सुझाव दिए गए हैं, जिन्हें अदालत के निर्देशों में शामिल किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति बागची ने कहा, “इस मामले से जुड़े कानून पहले से मौजूद हैं। आप उन कानूनों को देख सकते हैं और अगर उनमें कोई कमी है तो बता सकते हैं।”

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को भी इस जनहित याचिका में पक्ष बनाया जा सकता है।

भाषा जोहेब अविनाश

अविनाश