Surya Grahan 2026 In India Date and Time: इस साल का पहला सूर्य ग्रहण कब लगेगा? क्या भारत में दिखाई देगी ये खगोलीय घटना?

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Surya Grahan 2026 In India Date and Time: इस साल का पहला सूर्य ग्रहण कब लगेगा? क्या भारत में दिखाई देगी ये खगोलीय घटना?

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  • Publish Date - January 25, 2026 / 01:16 PM IST,
    Updated On - January 25, 2026 / 01:17 PM IST

Surya Grahan 2026 In India Date and Time: इस साल का पहला सूर्य ग्रहण कब लगेगा? क्या भारत में दिखाई देगी ये खगोलीय घटना? Image: FIle

HIGHLIGHTS
  • साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी (मंगलवार) को लगेगा
  • यह एक 'वलयाकार' सूर्य ग्रहण होगा
  • यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा

नई दिल्ली: Surya Grahan 2026 In India Date and Time  सनातन धर्म में ग्रहों और खगोलीय घटनाओं की बेहद अहम मान्यता है। जानकारों का मानना है कि खगोलीय घटनाओं से लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। इसके साथ ही ग्रहण को लेकर सनातन धर्म में मान्यताएं हैं जो आम आदमी की जिंदगी को प्रभावित करती है। तो ऐसे में आपको बताते हैं कि साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण कब लगेगा और क्या इसका प्रभाव भारत में भी देखने को मिलेगा।

Surya Grahan 2026 In India Date and Time  शास्त्र के जानकारों की मानें तो साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी, यानि मंगलवार को लगेगा। लेकिन इस बार सूर्य ग्रहण वलयाकार होगा, जिसे “रिंग ऑफ फायर” के नाम से भी जाना जाता है। अब सवाल ये है कि क्या होता है वलयकार सूर्य ग्रहण? तो आपको बताते चलें कि ग्रहण के दौरान जब चंद्रमा सूर्य के सामने आ जाता है लेकिन पूरी तरह ढक नहीं पाता। ऐसे में सूर्य के गोल घेरे में चमकदार रोशनी दिखाई देती है, जो देखने में बड़ा ही प्यारा लगता है।

क्या भारत में ​दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

शास्त्र के जानकारों की मानें तो साल 2026 में लगने वाला पहला सूर्य ग्रहण भारम में दिखाई नहीं देगा और ना ही सूतक काल भारत में माना जाएगा। हालांकि, दुनिया के कई अन्य हिस्सों में यह खगोलीय घटना स्पष्ट रूप से देखी जा सकेगी।

किस समय दिखेगा सूर्य ग्रहण

  • ग्रहण की शुरुआत (आंशिक चरण): शाम 3:26 बजे
  • वलयाकार चरण की शुरुआत: शाम 5:12 बजे
  • ग्रहण का चरम/पीक समय: शाम 5:42 बजे
  • ग्रहण की समाप्ति: शाम 7:57 बजे
  • पूरा सूर्य ग्रहण लगभग 2 घंटे से अधिक समय तक रहेगा

किन देशों में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

यह सूर्य ग्रहण भारत के अलावा दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका के कुछ हिस्सों, अटलांटिक महासागर और आसपास के क्षेत्रों में देखा जा सकेगा। इन स्थानों पर लोग वलयाकार सूर्य ग्रहण का अद्भुत दृश्य प्रत्यक्ष रूप से देख पाएंगे।

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

1. आंखों की सुरक्षा सबसे जरूरी

  • नग्न आंखों से न देखें: सूर्य को सीधे अपनी आंखों से कभी न देखें। ग्रहण के दौरान निकलने वाली हानिकारक अल्ट्रावाइलेट (UV) किरणें आपकी आंखों के रेटिना को हमेशा के लिए नुकसान पहुँचा सकती हैं (इसे ‘सोलर रेटिनोपैथी’ कहते हैं)।
  • प्रमाणित चश्मों का प्रयोग: साधारण धूप के चश्मे (Sunglasses) पर्याप्त नहीं होते। केवल ISO 12312-2 प्रमाणित ‘सोलर फिल्टर’ वाले चश्मों का ही उपयोग करें।
  • कैमरा और टेलीस्कोप: बिना उचित सोलर फिल्टर के कैमरे, दूरबीन (Binoculars) या टेलीस्कोप से सूर्य को न देखें। यह लेंस के माध्यम से किरणों को केंद्रित कर आंखों को तुरंत जला सकता है।

2. भोजन और स्वास्थ्य संबंधी मान्यताएं

  • पका हुआ भोजन: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान भोजन करने से बचना चाहिए। सूतक काल शुरू होने से पहले ही खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते डाल दिए जाते हैं ताकि वे शुद्ध रहें।
  • गर्भवती महिलाएं: पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है और नुकीली चीजों (जैसे सुई, चाकू) का प्रयोग टालना चाहिए।

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साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण कब लगेगा?

साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी, मंगलवार को लगने जा रहा है।

क्या 17 फरवरी का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?

नहीं, खगोलविदों और ज्योतिषियों के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिसके कारण यहाँ धार्मिक दृष्टि से सूतक काल के नियम लागू नहीं होंगे।

'रिंग ऑफ फायर' या वलयाकार सूर्य ग्रहण क्या होता है?

जब चंद्रमा पृथ्वी से दूर होता है और सूर्य के सामने आता है, तो वह सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता। ऐसे में सूर्य का बाहरी हिस्सा एक चमकदार छल्ले या अंगूठी की तरह दिखता है, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' कहते हैं।

ग्रहण का सबसे सटीक समय (Peak Time) क्या है?

भारतीय समय के अनुसार, ग्रहण का चरम (पीक) समय शाम 5:42 बजे होगा, जब 'रिंग ऑफ फायर' का दृश्य सबसे स्पष्ट दिखेगा।

ग्रहण के दौरान तुलसी के पत्तों का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा से भोजन और पानी को बचाने के लिए उनमें तुलसी के पत्ते डाले जाते हैं, क्योंकि तुलसी को शुद्धिकरण का प्रतीक माना जाता है।