चेन्नई, 28 मई (भाषा) पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) नेता अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु सरकार से राज्य में तुरंत जाति सर्वेक्षण कराने का बृहस्पतिवार को आग्रह किया।
अंबुमणि ने यहां एक बयान में कहा, “पीएमके ने बार-बार आग्रह किया है कि तमिलनाडु सरकार को सामाजिक न्याय की रक्षा करने के स्पष्ट उद्देश्य से विभिन्न जातियों के लोगों की संख्या का पता लगाने के लिए ‘सामाजिक न्याय सर्वेक्षण’ कराना चाहिए”
पीएमके नेता ने दावा किया कि इस तरह का सर्वेक्षण कराने में तमिलनाडु सरकार के समक्ष किसी भी तरह की रसद संबंधी या कानूनी कठिनाई नहीं है।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में 2025 में किए गए जाति सर्वेक्षण पर सरकारी खजाने से 635 करोड़ रुपये खर्च हुए थे और इस दौरान 6.26 करोड़ की कुल आबादी में से 5.9 करोड़ लोगों की जाति, शिक्षा, आर्थिक स्थिति, रोजगार और अन्य संबंधित विवरण एकत्र किए गए थे।
अंबुमणि ने कहा, “तमिलनाडु इसी पद्धति का इस्तेमाल करते हुए ‘सामाजिक न्याय सर्वेक्षण’ नामक समान सर्वेक्षण कर सकता है।”
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में इसी तरह का सर्वेक्षण कराने में 700 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है और राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए इसमें कोई समस्या नजर नहीं आती।
अंबुमणि ने कहा कि केंद्र सरकार की जाति जनगणना में पहले से एकत्रित जानकारी के अलावा केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के विवरण एकत्र किए जाएंगे, जो केवल जाति समूहों की पहचान करने में सहायक होंगे, लेकिन व्यापक सामाजिक परिस्थितियों को उजागर नहीं करेंगे।
भाषा पारुल रंजन
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