लोकसभा में कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक पेश, अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने का उद्देश्य

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लोकसभा में कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक पेश, अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने का उद्देश्य

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  • Publish Date - August 4, 2026 / 06:54 PM IST,
    Updated On - August 4, 2026 / 06:54 PM IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इसका उद्देश्य ‘‘विश्वसनीय नीतिगत व्यवस्था और प्रक्रियागत निश्चितता’’ उपलब्ध कराकर अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करना तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।

इस विधेयक में ‘फंड मैनेजरों’ के भारत आने को आसान बनाने का प्रस्ताव किया गया है, जबकि विदेशी निवेश को भारत में कारोबार में लगा पैसा नहीं माना जाएगा।

इसका उद्देश्य उन विदेशी कंपनियों को मिलने वाली आयकर छूट को 2040-41 तक बढ़ाना भी है, जो किसी भारतीय फैक्टरी को मशीनरी और उपकरण उपलब्ध कराती हैं और वो फैक्टरी अनुबंध विनिर्माण के तहत उनकी ओर से खास इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं बनाती है।

विधेयक में उल्लेख की गई खास इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनके मुख्य पार्ट्स और एक्सेसरीज शामिल हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्टरी को पुर्जों की आपूर्ति में मदद करने के लिए, यह विधेयक उन विदेशी कंपनियों को 2040-41 तक 15 साल के लिए आयकर में छूट देने का प्रस्ताव करता है, जो भारत में अनुबंध विनिर्माता को आपूर्ति करने के लिए ‘कस्टम्स वेयरहाउस’ में पुर्जे रखती हैं।

विधेयक में उन विदेशी ‘क्लाउड’ कंपनियों के लिए मंज़ूरी की जरूरत को भी खत्म किया गया है जो भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करती हैं।

इसमें यह भी प्रस्ताव किया गया है कि भारतीय डेटा सेंटर को सिर्फ सीधे मालिकाना हक के तहत संचालित करने के बजाय पट्टे के आधार पर संचालित किया जाए।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि विधेयक में किये गए प्रस्तावों का एकमात्र उद्देश्य है – भारत को वैश्विक पूंजी, विनिर्माण और कारोबार के लिए अधिक आकर्षक और भरोसेमंद जगह बनाना।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत चाहता है कि वैश्विक निवेश कोष, क्लाउड कारोबार और अवसंरचना निवेशक अपनी अधिकतर गतिविधियों को देश के माध्यम से संचालित करें। इसका मुख्य उद्देश्य नीतियों और प्रक्रियाओं में भरोसेमंद स्थिरता और निश्चितता उपलब्ध कराना है।’’

विधेयक में संदाय एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन का भी प्रस्ताव है। इसके तहत उस मौजूदा कानूनी प्रावधान को हटाने की बात कही गई है, जो बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) वसूलने से रोकता है।

विधेयक में किये गए मुख्य प्रस्ताव इस प्रकार हैं–

‘फंड मैनेजर’ को आकर्षित करना:

विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए, विधेयक में फंड मैनेजर को भारत लाने को आसान बनाने का प्रस्ताव किया गया है। वैश्विक निवेश कोष का संचालन दक्ष फंड मैनेजर द्वारा किया जाता है। अब तक कई तरह की शर्तों के कारण ऐसे फंड मैनेजर भारत आने से हिचकते हैं, क्योंकि उन्हें इस बात का अंदेशा है कि ऐसा करने से पूरा विदेशी कोष भारत में कर के दायरे में आ सकता है।

विधेयक इन शर्तों की लंबी सूची को कम करता है और केवल उन्हीं जरूरी प्रावधानों को बनाए रखता है, जो दुरुपयोग तथा भारतीय निवासियों द्वारा धन की हेराफेरी (राउंड ट्रिपिंग) को रोकने के लिए आवश्यक हैं।

डेटा सेंटर:

विधेयक में डेटा सेंटर के लिए अधिक स्पष्ट और सरल नियमों का प्रस्ताव किया गया है। पूर्व में भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों को कर छूट देने का वादा किया गया था, लेकिन इसके लिए उन्हें सरकार की बहुस्तरीय मंजूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।

निवेशकों को राहत:

व्यावसायिक ट्रस्ट में निवेश करने वाले निवेशकों को राहत देते हुए विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) और अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) के निवेशकों को मिलने वाला लाभांश कर-मुक्त बना रहेगा, भले ही संबंधित परिचालन कंपनी नयी आयकर व्यवस्था अपना ले।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण:

भारत को विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में विनिर्माण केंद्र के रूप में मजबूत करने और वैश्विक कंपनियों को उपकरण, पुर्जे तथा सामग्री लाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अनुबंध पर विनिर्माण करने वाली कंपनियों से जुड़ी विदेशी कंपनियों को कर छूट देने का प्रस्ताव किया गया है। यह छूट, जो वर्तमान में पांच साल के लिए उपलब्ध है, उसे 10 साल और बढ़ाकर वित्त वर्ष 2040-41 तक करने का प्रस्ताव है।

विधेयक में संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए और आयकर अधिनियम की धारा 269एसयू में आवश्यक बदलाव करने का प्रस्ताव किया गया है। मौजूदा प्रावधान के तहत 50 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले बड़े व्यवसायों के लिए ‘रुपे’ डेबिट कार्ड और भीम-यूपीआई क्यूआर कोड सहित कुछ निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भुगतान स्वीकार करना अनिवार्य है।

भाषा सुभाष वैभव

वैभव