बंगाल विधानसभा में प्रति वर्ष औसतन 33 बैठक हुई, 91 प्रतिशत विधेयक पेश किये जाने के दिन ही पारित

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बंगाल विधानसभा में प्रति वर्ष औसतन 33 बैठक हुई, 91 प्रतिशत विधेयक पेश किये जाने के दिन ही पारित

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  • Publish Date - April 22, 2026 / 07:15 PM IST,
    Updated On - April 22, 2026 / 07:15 PM IST

नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा की 2021 और 2026 के बीच 166 दिन बैठक हुई और सदन की कार्यवाही 430 घंटे चली। शोध संस्थान ‘पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च’ द्वारा किये गए एक विश्लेषण में यह जानकारी दी गई है।

इस अवधि के दौरान विधानसभा की प्रति वर्ष औसतन 33 बैठक हुई।

विशेषज्ञ समूह द्वारा जारी एक विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि 91 प्रतिशत विधेयक जिस दिन पेश किए गए, उसी दिन पारित किये गए। वहीं, 2011 के बाद से कोई भी विधेयक समिति को नहीं भेजा गया।

विश्लेषण में कहा गया है कि विधानसभा की प्रत्येक वर्ष आमतौर पर कई सत्रों में बैठक होती है, जिसकी शुरुआत बजट सत्र से होती है और उसके बाद अतिरिक्त सत्र होते हैं।

हालांकि, 17वीं विधानसभा के दौरान सत्र स्थगित तो किये गए, लेकिन सत्रावसान नहीं किया गया। परिणामस्वरूप, एक ही सत्र प्रभावी रूप से 2023 से 2026 तक जारी रहा।

सत्रावसान न होने की स्थिति में, सत्र जारी माना जाता है, और लंबित कार्य, जिनमें नोटिस, विधेयक, प्रस्ताव और संकल्प शामिल हैं, निष्प्रभावी नहीं होते। अध्यक्ष सदन की बैठक पुनः बुला सकते हैं, और इसके लिए राज्यपाल से किसी नये समन की आवश्यकता नहीं होती।

वर्ष 2024 में, राज्यपाल का अभिभाषण, जो आमतौर पर प्रत्येक वर्ष पहले सत्र के प्रारंभ में दिया जाता है, नहीं दिया गया क्योंकि सत्र को चौथे सत्र की निरंतरता के रूप में माना गया था, जो 2023 में शुरू हुआ था।

हालांकि, 2025 और 2026 में भी वही सत्र जारी रहा, लेकिन राज्यपाल ने उन वर्षों में सदन में अभिभाषण नहीं दिया। इस अवधि के दौरान कुल 74 विधेयक पेश किये गए।

अपराजिता महिला एवं बाल (पश्चिम बंगाल आपराधिक कानून संशोधन) विधेयक, 2024 (जो यौन अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रावधान करता है) और पश्चिम बंगाल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (पहचान) (संशोधन) विधेयक, 2022 (जो जाति प्रमाण पत्रों के रद्द होने या निरस्त होने के खिलाफ अपील तंत्र स्थापित करता है) उन विधेयकों में शामिल थे, जिन्हें उनके पेश किए जाने के दिन ही पारित कर दिया गया।

पीआरएस के विश्लेषण के अनुसार, 17वीं विधानसभा के दौरान, 62 प्रतिशत विधेयकों को पारित होने के तीन महीने के भीतर राज्यपाल की मंजूरी मिल गई।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश