अदालत ने दंगा करने और गैरकानूनी सभा के लिए तीन लोगों को दोषी ठहराया

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अदालत ने दंगा करने और गैरकानूनी सभा के लिए तीन लोगों को दोषी ठहराया

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  • Publish Date - May 21, 2026 / 06:57 PM IST,
    Updated On - May 21, 2026 / 06:57 PM IST

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले में तीन लोगों को दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने सफलतापूर्वक साबित किया है कि संबंधित लोग एक गैरकानूनी सभा का हिस्सा थे, जिसने खजूरी खास में हिंसा के दौरान पुलिस पर पथराव किया और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के काम में बाधा डाली।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह दंगा, गैरकानूनी सभा और लोकसेवकों पर हमले के आरोप में इकराम, सरफराज और मुस्तकीम के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सबूतों से आरोपियों का अपराध साबित होता है।

अदालत ने 18 मई के एक आदेश में कहा, ‘‘रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं कि संबंधित अवधि के दौरान गैरकानूनी सभा में शामिल लोग पुलिस बल पर लगातार पत्थर फेंक रहे थे, जिससे लोकसेवकों के कर्तव्य निर्वहन में बाधा उत्पन्न हुई और कई पुलिसकर्मियों को चोटें आईं।’’

अभियोजन पक्ष के अनुसार, तीनों व्यक्तियों पर 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा पुलिस बूथ और करावल नगर रोड के पास हुए दंगों में शामिल होने का आरोप है। इन दंगों के दौरान, उग्र भीड़ ने दुकानों, ठेलों और एक पुलिस बूथ में आग लगा दी तथा पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। झड़पों में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

इसके बाद खजूरी खास थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और सभी आरोपियों के खिलाफ उकसाने, दंगा करने, घातक हथियार रखने, गैरकानूनी सभा करने और लोकसेवकों के कार्य निर्वहन में बाधा डालने के आरोप तय किए गए।

अदालत ने तीनों को गैरकानूनी सभा में शामिल होने का दोषी ठहराया।

लेकिन अदालत ने कहा कि पुलिस चौकी जलाने और संपत्ति नष्ट करने से संबंधित आगजनी और तोड़फोड़ के आरोपों के लिए दोषियों को जिम्मेदार ठहराने के लिए सबूत अपर्याप्त हैं। अदालत ने यह भी पाया कि घातक हथियारों से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 148 के तहत लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए।

भाषा संतोष नेत्रपाल

नेत्रपाल

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