कोलकाता, 28 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस में रविवार को पार्टी पर ‘‘नियंत्रण’’ की लड़ाई कानूनी दायरे में और आगे बढ़ गई। ममता बनर्जी के गुट ने बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी और उनके सहयोगियों के खिलाफ पुलिस में नयी शिकायतें दर्ज कराईं तथा आरोप लगाया कि प्रतिद्वंद्वी खेमे ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को गुमराह करने के लिए पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक पदों का गैर-कानूनी तरीके से इस्तेमाल किया।
विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के अंदर एक महीने से जारी संघर्ष में यह कदम एक बड़े बदलाव को दिखाता है; अब दोनों गुट पार्टी की विरासत पर अपना दावा मजबूत करने के लिए कानूनी और संगठनात्मक तरीकों का सहारा ले रहे हैं।
कालीघाट पुलिस थाने और कोलकाता पुलिस की साइबर अपराध शाखा में हाल ही में दर्ज शिकायतों में ममता बनर्जी खेमे ने ऋतब्रत बनर्जी, पूर्व मंत्री अरूप रॉय, जावेद खान, संदीपन साहा और बिप्लब मित्रा का नाम लिया गया है। उन पर आरोप है कि वे पार्टी नेतृत्व की मंज़ूरी के बिना खुद को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ का पदाधिकारी बताकर एक समानांतर संगठन चलाने की कोशिश कर रहे हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक पदों का इस्तेमाल करके कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भ्रम पैदा कर रहे हैं और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
पुलिस में शिकायतें उस घटना के एक सप्ताह से भी कम समय में दर्ज कराई गईं, जब बागी गुट ने न्यू टाउन के एक होटल में पार्टी का ‘विशेष सत्र’ आयोजित किया था। इस सत्र में एक नयी राष्ट्रीय कार्यसमिति की घोषणा की गई, जिसमें ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी, दोनों को ही शामिल नहीं किया गया था।
भाषा शफीक रंजन
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