न्यायालय ने घर ख़रीदारों के पैसों की हेराफेरी से जुड़ी याचिका पर केंद्र, ईडी, आरबीआई से मांगा जवाब

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न्यायालय ने घर ख़रीदारों के पैसों की हेराफेरी से जुड़ी याचिका पर केंद्र, ईडी, आरबीआई से मांगा जवाब

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  • Publish Date - May 28, 2026 / 04:41 PM IST,
    Updated On - May 28, 2026 / 04:41 PM IST

नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और कुछ रियल एस्टेट फर्म सहित अन्य से उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में घर खरीदारों से एकत्र किये गए हजारों करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने बुधवार को याचिकाकर्ता वंदना सभरवाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण की दलीलों पर गौर किया और प्रतिवादियों को 15 जुलाई के लिए नोटिस जारी किया।

आवास और शहरी कार्य तथा कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालयों के अलावा, ईडी और आरबीआई से भी जवाब मांगा गया है।

पीठ ने उत्तर प्रदेश रेरा (रियल एस्टेट विनियमन और विकास प्राधिकरण), नोएडा प्राधिकरण, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा), जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल), जयप्रकाश इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल), स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक तथा सीआरसी होम्स, सीआरसी ग्रीन्स, गौरसन्स, गुलशन होम्स, महागुन और इन्वेस्टर्स क्लिनिक जैसे डेवलपर से भी जवाब मांगे हैं।

सभरवाल ने अपनी याचिका में कहा कि यह मामला रियल एस्टेट क्षेत्र में एक व्यापक प्रणालीगत पद्धति को दर्शाता है, जहां डेवलपर कथित तौर पर घर ख़रीदारों के धन का दुरुपयोग करते हैं, जमीन और विकास अधिकार संबंधित संस्थाओं को हस्तांतरित करते हैं, और अंततः परियोजनाओं को दिवालियापन की ओर धकेलते हैं, जिससे ख़रीदार अधर में लटक जाते हैं।

भूषण ने ईडी की जांच के निष्कर्षों का हवाला दिया, जो धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामले की जांच कर रही है। उन्होंने पीठ को बताया कि ईडी ने पाया है कि जेएएल और जेआईएल द्वारा 25,000 से अधिक घर ख़रीदारों से एकत्र किए गए लगभग 14,559 करोड़ रुपये में से ‘‘काफी बड़ी रकम’’ गैर-निर्माण कार्यों के लिए इस्तेमाल की गई और जेपी समूह की कंपनियों सहित संबंधित समूह संस्थाओं को हस्तांतरित कर दी गई।

भूषण ने कहा, ‘‘यह समस्या हर परियोजना में बार-बार सामने आती है। घर ख़रीदारों से धनराशि एकत्र की जाती है, उसे कहीं और लगा दिया जाता है, और अंततः कंपनियां दिवालिया हो जाती हैं तथा घर ख़रीदार गंभीर संकट में फंस जाते हैं…।’’

भूषण ने यह भी कहा कि डेवलपर नियमित रूप से जमीन और अन्य संपत्तियों को संबद्ध कंपनियों को हस्तांतरित कर देते हैं, जिससे जांच में धन की हेराफेरी का खुलासा होने के बाद भी पैसे वापस पाने के प्रयास विफल हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि हालांकि ईडी ने लगभग 400 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है, लेकिन कथित हेराफेरी में 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां शामिल हैं।

उन्होंने पीठ से आग्रह किया कि वह ईडी को अपनी जांच शीघ्रता से पूरी करने का निर्देश दे।

भूषण ने कहा, ‘‘हो यह रहा है कि ये संपत्तियां आमतौर पर कभी वापस नहीं मिल पातीं। जांच से पता चलता है कि इन्हें संबंधित कंपनियों में हस्तांतरित कर दिया जाता है…।’’

उन्होंने आरबीआई को ऐसी रूकी पड़ी आवास परियोजनाओं को वित्तपोषित करने वाले बैंकों का ऑडिट करने का निर्देश देने की भी मांग की। उन्होंने दलील दी कि बैंकों को भी काफी नुकसान हो रहा है।

भूषण ने कहा, ‘‘आरबीआई को जो चीजें करनी चाहिए उनमें से एक यह है कि वह दिशानिर्देश जारी करे क्योंकि यह समस्या हर जगह हो रही है और कई बैंक ऐसी परियोजनाओं में पैसे गंवा रहे हैं।’’

राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष चल रही कार्यवाही का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि संपत्ति की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद, रिफंड का विकल्प चुनने वाले घर खरीदारों को एक दशक पहले भुगतान की गई मूल राशि ही दी जा रही है और वह भी बिना ब्याज के।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम आज रिफंड चाहते हैं, तो हमें 12 साल पहले भुगतान की गई राशि दी जा रही है, वह भी बिना किसी ब्याज के। जबकि आज उसी फ्लैट की कीमत तीन गुना बढ़ गई है।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में जटिल मुद्दे शामिल हैं और उन्होंने गौर किया कि इसी तरह के आरोपों से जुड़े एक अन्य मामले में अदालत ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी, जबकि मौजूदा मामले में ईडी ने पहले ही मामला दर्ज कर लिया है।

पीठ ने कहा, ‘‘देखते हैं वे क्या कहते हैं,’’ और ईडी को अपनी जांच की प्रगति के संबंध में एक वस्तु स्थिति रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने को कहा।

न्यायालय ने सभी प्रतिवादियों को 15 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

भाषा सुभाष संतोष

संतोष